गर्भावस्ता में सोते समय इन बातोंका रखे ध्यान।

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गर्भावस्ता के दिनों में हर महिला चाहती है की वह स्वस्थ रहे। लेकिन स्वस्थ रहने के लिए अच्छी नींद मिलना बहुत जरूरी है। कुछ महिलाओंको गर्भावस्ता के दिनों में अच्छी नींद आती है वो अच्छी तरह से सो पाती है लेकिन, कुछ महिलाओंको नींद के बारे में बहुत परेशानी का सामना करना पड़ता है। उनकी नींद पूरी नहीं हो पाती है, जिसके वजह से उनका स्वाभाव भी काफी चीड़ चिड़ा बन जाता है। 

आज मै आपको बताने वाली हूँ, गर्भावस्ता के दिनों में आने वाली परेशानी के बारे में और इन दिनों सोते समय कोनसी बातोंका ध्यान रखना चाहिए उसके बारे में। तनाव आपकी नींद को ख़राब करने का सबसे बड़ा कारण है। अगर आपको स्वस्थ रहना है, एक हैल्थी बच्चा चाहिए तो तनाव से दूर रहे।

गर्भावस्ता के दौरान महिलाओंको नींद नहीं आती या फिर बिच रात में नींद खुल जाती है और इसके बाद नींद नहीं आती। इस तरह कई समस्याओंका सामना करना पड़ता है।

इसके अलावा गर्भावस्ता में कमर दर्द, पैर में दर्द, हार्ट बर्न, साँस लेने में परेशानी जैसे कई समस्या के कारण नींद नहीं आती है। अपनी दिनचर्या में बदलाव करके आप अच्छी नींद पा सकती है। इसके लिए आपको दिनभर में ज्यादा से ज्यादा तरल पदार्थोंका सेवन करना चाहिए। दिनभर में आप पानी, फलोंका रस, नारियल पानी, सुप का सेवन कर सकते है। लेकिन रात को सोते समय आपको तरल पदार्थोंका सेवन कम करना होगा।

ये चीजे बच्चे के लिए सही नहीं है। Do Not Eat

रात के समय ज्यादा तरल पदार्थ का सेवन करने से बार बार पेशाब आती है, इससे आपकी नींद खुल सकती है। इसीलिए रात के समय में पानी कम पिए और तरल पदार्थ भी कम करे। 

इसके अलावा गर्भवती महिला को नियमित रूप से व्यायाम करना होगा। आपको हर दिन मॉर्निंग वाक और इविनिंग वाक की आदत डालनी होगी । ऐसा करने से आपकी नींद पूरी हो जाएगी।

गर्भावस्ता में अच्छी नींद पाने के लिए आप रात को सोते समय १ गिलास गर्म दूध पी सकती है। साथ ही अच्छी किताबे भी पढ़ सकती है। अपने पार्टनर के साथ अच्छी बातोंपर गप्पे लड़ा सकती है।  

इन चीजोंसे आपका मूड भी अच्छा बनेगा और आप रिलैक्स महसूस करेंगी, जिससे आपको अच्छी नींद आएगी। गर्भावस्ता के दौरान मसालेदार और तीखा भोजन करने से बचे। इससे आपको सीने में जलन और एसिडिटी की समस्या हो सकती है। रात को सोते समय २-३ घंटे पहले भोजन करे। 

अच्छी दिनचर्या के साथ गर्भावस्ता में स्लीपिंग पोजीशन एक अहम रोल निभाती है। गलत तरीकेसे सोने से नींद प्रभावित होती है, साथ ही भ्रूण पर भी इसका विपरीत प्रभाव पड़ता है।

गर्भावस्ता में पीठ के बल सोने से बच्चे को साँस लेने में तख़लीफ़ होती है और आपकी नींद खुलती है। गर्भावस्ता में बाई तरफ सोने से रक्त परिसंचरण में सुधार आता है। इसके अलावा करवट लेते समय कभी भी एकदम से झटका नहीं देना चाहिए। ऐसा करने से आपको और बच्चे को परेशानी हो सकती है।

गर्भावस्था में ध्यान करने के क्या लाभ है

ध्यान शरीर में जीवन शक्ति का संचार करता है और प्राण ऊर्जा को बढ़ाता है | गर्भवती स्त्री के बच्चे को विकास के लिए बहुत ही अधिक ऊर्जा की आवश्यकता पड़ती है।

ध्यान करने से शरीर में ऊर्जा निर्माण होती है। ध्यान करना मां और बच्चा दोनों के सेहत के लिए फायदेमंद है।

गर्भावस्था में ध्यान करने से आपके शरीर का अपने आप उपचार होने लगता है और बच्चे की सेहत भी अच्छी बनती है।

गर्भावस्था में मन का संतुलन खराब होता है। महिला को चिड़चिड़ापन होने लगता है | जैसे जैसे बच्चे की संवेदनाएं विकसित होती है, वैसे-वैसे बच्चा आपकी सारी संवेदना महसूस करने लगता है।

इसलिए इस समय पर शांत रहें | प्रसन्न रहना आरामदायक रहना बहुत ही आवश्यक है। इसलिए ऐसे वक्त में ध्यान करना बहुत ही जरूरी है।

ध्यान करने से आपका मन प्रसन्न रहेगा | ध्यान मन को विश्राम देता है जिससे भावनात्मक और संतुलन को झेलना आसान हो जाता है।

यह शरीर को विश्राम देने का सबसे अच्छा उपाय है। यह रीड की हड्डी पर पड़ने वाले दबाव को कम कर देता है, जिसके कारण महिला गर्भावस्था के अंतिम चरण में भी आरामदायक स्थिति में नहीं सकती है।

गर्भावस्था में उच्च रक्तचाप और मधुमेह होने का खतरा बना रहता है। ऐसे वक्त में ध्यान करने से कई बीमारियों का खतरा कम हो जाता है। गर्भावस्था में ध्यान करने से बहुत ही अच्छी नींद आती है।

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