नारायण चूर्ण के बारे में जानकारी।

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नारायण चूर्ण एक आयुर्वेदिक औषधि है . इस औषधि में वात, पित्त, कफ दोष को दूर करने के गुण मौजूद होते है . 

ये एक पाचक औषधि है जो पेट से संबंधित समस्याओं का इलाज करने के लिए बहुत लाभकारी है. बवासीर या अर्श की समस्या में मल त्याग करते समय बहुत परेशानी होती है कुछ लोगों को हमेशा कब्ज की शिकायत रहती है जिसके कारण उनका पेट अच्छी तरह से साफ नहीं होता और बवासीर की समस्या निर्माण होती है|

ऐसे समय में आप नारायण चूर्ण का सेवन कर सकते है इससे पेट अच्छी तरह से साफ हो जायेगा और कब्ज की समस्या भी नहीं रहेगी | जिन लोगों के पेट में कीड़े है, जिन्हे बार बार भूक लगती है, लेकिन वजन नहीं बढ़ता है ऐसे लोगों को इस चूर्ण का सेवन जरूर करना चाहिए इससे पेट के कीड़े मर जाते है |

भोजन करने के बाद खट्टी डकारे आना, जी मचलाना उल्टी या दस्त लगना जैसी समस्या में आप नारायण चूर्ण का सेवन कर सकते है | पेट में गैस बनने की समस्या में ये चूर्ण बहुत ही गुणकारी है | श्वसन संबंधी समस्या जैसे की अस्थमा क्रोनिक कफ में ये चूर्ण फायदेमंद होता है |

इस चूर्ण का नियमित सेवन अग्नि को प्रदीप्त करता है,  मेटाबोलिज्म को सुधारता है | इसके नियमित सेवन से अच्छी तरह से भूख लगने लगती है | जलोदर कुष्ठ पांडू जैसी समस्या में भी इससे लाभ होता है|

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नारायण चूर्ण में मौजूद घटक –

अजवायन, हाऊबेर, धनिया, हरड़, बहेड़ा, आवला, कलौंजी, कालाजीरा, सौंफ, पीपलमूल, अजमोदा, कचूर, बच,  सोंठ, कालीमिर्च, पीपल, सत्यानाशी की जड़, चीतामूल, जवाखार,सज्जीक्षार,पुष्करमूल कूठ, सेंधा नमक, काला नमक, सांभर नमक , समुद्र नमक, बीड नमक वायविडंग, निसोत, दंतीमूल, इन्द्रायण की जड़ थूहर के पत्ते   और थूहर के दूध की भावना

नारायण चूर्ण की मात्रा –

१ से ५ ग्राम चूर्ण सुबह श्याम गर्म पानी के साथ ले सकते है. हाइपरटेंशन के मरीज को इसका सेवन नहीं करना चाहिए.  इसमें अलग अलग तरह के नमक होते है जिसके कारण ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है | किडनी डिजीज की समस्या में इसका उपयोग सम्भालकर करना चाहिए | प्रेगनेंसी में या छोटे बच्चों को इसका सेवन नहीं करना |

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