पर्यावरण प्रदूषण

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दोस्तो आज हम बात करेंगे देश की सबसे बड़ी समस्या पर्यावरण प्रदूषण पर | एक स्वस्थ जिंदगी जीना हम सब की चाहत है, फिर भी कोई स्वस्थ नहीं है , इसके लिए जिम्मेदार कौन है ? हम दिन भर मेहनत करके हम कुछ पैसे कमाते है जिससे जिंदगी का गुजरा अच्छे से हो, लेकिन ऐसा नहीं होता हमारी आधी कमाई जाती है हॉस्पिटल और मेडिसिन में |  

पर्यावरण प्रदूषण के कारण  लोगों की जिंदगी नरक बन चुकी है | कुछ लोग तो धरती को स्वर्ग कहते है, पर लोगों ने ही इस धरती को नरक कब बनाया इसका पता भी नहीं चला | आज हमारे सामने आरोग्य, शिक्षा, पानी, सडके, भोजन जैसी कई सारी समस्याएं है | इसमें फिर एक समस्या आती है प्रदूषण |

पर्यावरण प्रदूषण के लिए सिर्फ और सिर्फ इंसान ही जिम्मेदार है | लोगोंने पढ़ लिखकर तरक्की तो बहुत की पर जिंदगी के छोटे छोटे नियमों को कोई नहीं समझ सका | 

कचरा देखकर गंदगी तो सबको लगती है पर कोई ये नहीं सोचता ये भी तो किसी अपने ने ही फेंका होगा | दोस्तों प्रदूषण आज कई रूप से हमारी जान लेने के लिए तैयार है | पर्यावरण प्रदूषण चाहता है की आप और कूड़ा कचरा फेको जिससे इस दुनिया का नाश जल्दी हो जाये | अगर हम सब मिलकर प्रदूषण से लड़ेंगे तो उसे जरूर हराएंगे |

दोस्तों पर्यावरण प्रदूषण के कई कारण है,  प्रदूषण करने वाली सबसे अव्वल चीज है प्लास्टिक जो सबको बेहद पसंद है | कपडे खरीदो तो प्लास्टिक की बैग से घर लेकर आओ, पानी पिने के लिए प्लास्टिक बोतल लो, टिफिन लेके जाने के लिए प्लास्टिक का डिब्बा, बच्चों के खिलोने पल्स्टिक के, खाने की सभी चीजे प्लास्टिक में ये सभी जगह प्लास्टिक के इस्तमाल ने हमारी जिन्दगी मुश्किलों से भर दी | 

पर ये बात हम लोगों के समझ में कहा आएगी | हम लोग इस्तमाल किये गए प्लास्टिक को कही पर भी फेंक देते है, हाँ कुछ समज़दार लोग है जो प्लास्टिक को कचरे के डिब्बे में फेंक देते है लेकिन चाहे आपने इसे कही पर भी फेका हो ये जायेगा तो हमारे ही पर्यावरण में |

कुछ लोगों को लगता है रोड पर प्लास्टिक फेकना बंद करने से प्रदूषण की समस्या से बच सकते है | लेकिन ये गलत सोच है जब तक हम प्लास्टिक का  इस्तमाल पूरी तरह बंद नहीं करते है, तब तक ये समस्या खत्म नहीं होगी | आज देश में कई जगह पर प्लास्टिक के ढेर पड़े है | 

प्लास्टिक एक ऐसी चीज है जिसका विघटन(Decompose) नहीं होता | लाखो साल भी प्लास्टिक अगर किसी जगह पर पड़ा रहा तो वो वैसे का वैसे ही रहता है |  इतनी खतरनाक चीज को हम दिन में कितनी बार इस्तमाल करते है | 

अगर हम खुद की भलाई चाहते है, आने वाली पीढ़ी को स्वस्थ जिन्दगी देना चाहते है तो हमे जल्दी कुछ करने की जरूरत है | अगर हम सब मिलकर कहेंगे की अब से प्लास्टिक की इस्तमाल नहीं करना है तो ये कोई मुश्किल बात नहीं है |

कुछ शहर गंदगी से भरे हुए है | कचरे का कोई व्यवस्थापन नहीं है | मुन्सिपाल्टी की गाड़ी कचरे को लेकर जाती है और नदी के बहते पानी में छोड़ देती है | एक तो नदिया मुश्किल से बहती है, ४ -४ साल तक नदी को पानी नहीं होता | साल भर बहनेवाली नदिया अब बरसात में कभी कभी बहती है | उस पानी का फायदा लेने के बजाय लोग लोग उसे ही प्रदूषित करते है |  

कुछ घरों में उसी पानी का इस्तेमाल पिने के लिए किया जाता है और  फिर शुरू होती है बिमारियों की कहानिया| कुछ लोग यात्रा के लिए तीर्थक्षेत्र पर जाते है, नदी के पानी में मल मूत्र विसर्जित करते है उसी पानी में स्नान करते है | फिर उनके समझ में आता  है, ये तो पवित्र नदी है फिर वो उसका तीर्थ प्राशन करते है | कुछ लोग तो बोतल में भर कर उस पानी को घर लेके आते है और घरवालों को भी पिलाते है, एक के साथ सब बीमार और फिर शुरू होते है हॉस्पिटल के चक्कर | 

जब बाढ़  का पानी लोगों के घर में घुस जाता है, चारो तरफ फेका हुआ कचरा फिर लोगों के घर में आ जाता है |

फिर भी इंसान नहीं समज़ता, ये अपने ही कर्मों की शिक्षा है | कब समजेगा इंसान अब तुझे ही करनी तेरी रक्षा है |

दोस्तों मुझे लगता है हमारे देश में प्रगति की कई सारी कंपनिया शुरू हुयी, लोगों को काम मिल गया, लेकिन इन कंपनियों के कारण प्रदूषण ने हमारी उम्र भी कम कर दी | कंपनियों का केमिकल युक्त पानी नदी में छोड़ा जाता है, नदी का वही पानी खेती के लिए इस्तेमाल होता है | फिर खेती में उगने वाले अनाज की गुणवत्ता भी कम हो जाती है |

पानी में मौजूद केमिकल की कुछ मात्रा अनाज में चली जाती है, वही अनाज खाकर लोग कैंसर, डायबिटीज, ह्रदयरोग जैसी समस्या का शिकार बनते है और अपनी जिंदगी से हाथ धोकर बैठते है |

कभी कभी प्रदूषित पानी जमीन पर ही छोड़ दिया जाता है जिससे भूमि प्रदूषण होता है और उस जमीन पर कभी भी अनाज नहीं उगता | एक तो हमारे देश में उपजाऊ जमीन कम है, इस तरह से अगर हम जमीन बर्बाद करेंगे तो एक दिन खाने वाले लोग ज्यादा होंगे और भोजन कम होगा | इस बात को हम जितना जल्दी समज़ते है उतना ही अच्छा है | 

कुछ लोग पेड़ काटते है, पेड़ काटने से मिट्ठी एक जगह से दूसरी जगह चली जाती है जिससे मिट्ठी का प्रदूषण होता है | पेड़ हमारे लिए कितने फायदेमंद है ये बात तो स्कूल का छोटा बच्चा भी जानता  है, फिर भी लोग पेड़ काटते है | पेड़ पौधों के बिना हमारी स्वस्थ जिंदगी असंभव है | इस बात को हम जितना जल्दी समझे उतना ही अच्छा है | 

लोगों की मॉडर्न लाइफस्टाइल ने गाड़ियों का इस्तेमाल बढ़ा दिया और फिर शुरुवात हुयी वायु प्रदूषण और ध्वनिप्रदूषण की | गाड़ियों के धुएं से कार्बन मोनोऑक्साइड नाम का जहरीला वायु बाहर निकल जाता है, जो लोगों के दिल दिमाग और फेफड़ों पर बुरा असर डालता है | लोगों के साथ साथ ये जहर पशु पंछियों की जान भी ले रहा है | प्रदूषण के कारण हर साल देश से कितनी पंछियों की प्रजातिया नष्ट हो रही है | 

गाड़ियों के हॉर्न के कारण ध्वनि प्रदूषण हो रहा है | दिनभर हॉर्न की आवाज सुनकर लोगों को रात को अच्छी नींद नहीं आती, कुछ लोग सिरदर्द का शिकार बन जाते है | कुछ लोगों के कान इस तरह से खराब हुए जो अब कभी भी सुन नहीं सकते | ध्वनि प्रदूषण का बुरा असर गर्भवती महिलाओं पर भी पड़ता है जिसके कारण बच्चा जनम से ही भहरा पैदा होता है |

कुछ लोग दिवाली में या इलेक्शन रिजल्ट के बाद, मैच जितने के बाद इस तरह से फटाके के बजाते है जैसे उसकी आखरी दिवाली हो | मैच जितने के बाद ये फटाके बजाकर साबित करना चाहते है की सिर्फ हम ही देश से प्यार करते है, असल में तो यही लोग देश का नुकसान ही कर रहे है | 

फटाकों  की आवाज से कई बूढ़े लोगों को हार्ट अटेक आ जाता है, जिसमे लोग अपने प्राण खो देते है | आपका आनंद किसी के दुःख का कारण बने ये तो गलत बात है |  

फटाकों से निकलने वाला धुआँ आपके ख़राब फेफड़ों को और ख़राब बनाता है | मेरे खयाल  से अगर इतनी ही धमाकों की आवाज अच्छी लगती है तो मिल्ट्री में जाये वहा बॉर्डर पर अपना शौर्य दिखाए | वैसे भी देश में सैन्य की कमी तो है ही | गली में बैठकर चूहों की तरह फटाके बजाकर अपने ही लोगों की जान खतरे में डालने वाला काम देश के जवानो को शोभा नहीं देता |

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