पल्स ऑक्सीमीटर

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पल्स ऑक्सीमीटर एक डिवाइस होता हैl इसके नाम से ही हमें पता चलता है कि यह पल्स और ऑक्सीजन लेवल काउंट करता है।

पल्स रेट यानी कि 1 मिनट में हमारा दिल कितनी बार धड़कता है | इसे हार्ट रेट यानी की हृदय की गति भी कहा जाता हैl पल्स रेट हर व्यक्ति में अलग अलग होता है। पल्स रेट की नॉर्मल वैल्यू 60 से 100 बीट पर मिनिट (BPM)होती है।

यह वैल्यू अलग-अलग समय में अलग-अलग भी आ सकती है। जैसे कि बैठे हुए स्थिति में अलग, या कोई भी मेहनत का काम करने के बाद, दौड़ने के बाद अलग, किसी बीमारी के कारण यह बढ़ सकती है, या कम हो सकती है। किसी दवाओं के साइड इफेक्ट के कारण भी पल्स रेट में बदलाव देखने को मिलते हैंl पल्स रेट जब 100 से आगे जाता है तो उसे टेकिकार्डिया कहते हैंl जब यह रेट 55-60 से नीचे जाता है तो उसे ब्रैडीकार्डिया कहते हैं |

एथलेटिक व्यक्ति का पल्स रेट 50-60 बीट पर मिनिट हो सकता हैl नवजात बच्चे का पल्स रेट 160 बीट पर मिनिट होता है |

टेकिकार्डिया कब होता है

हार्टडिजीज जैसे कि कोरोनरी आर्टरी डिजीज, हार्ट valveडिजीज,हार्टअटैक, हार्ट फैलियर,हार्ट में ट्यूमर होने पर पल्स रेट बढ़ने लगता है|

जन्मजात दिल से संबंधित किसी बीमारी के कारण भी पल्स रेट बढ़ा हुआ ही रह सकता है| अगर शरीर में किसी भी प्रकार का बैक्टीरियल और वायरल इंफेक्शन है तो भी पल्स रेट बढ़ सकता है।

बुखार आने पर भी पल्स रेट बढ़ने लगता है। उच्च रक्तचाप के कारण ब्लड प्रेशर बढ़ने के साथ हार्टरेट भीबढ़ सकता है।

हाइपरथाइरॉएडिज्म के कारण भी पल्स रेट बढ़ा हुआ रह सकता है। फेफड़ों से संबंधित बीमारियां जैसे कि निमोनिया, सीओपीडी, फेफड़ों में खून की गुठली अटकने के कारण जिसे मेडिकल भाषा में पलमोनरी एंबॉलिज्म कहते हैं|शरीर में खून की कमी होने पर या एनीमिया की स्थिति में शरीर में रक्त स्राव होने पर पल्स रेट बढ़ सकता है। नशीली चीजों का सेवन करने के बाद शराब या सिगरेट पीने के बाद भी पल्स रेट बढ़ सकता है|

ब्रैडीकार्डिया कब होता है
हार्ड टिशु डैमेज होने के कारण, हार्ट अटैक के दौरान पल्स रेट कम हो जाता।

हार्ट सर्जरी के कारण
हाइपोथाइरॉएडिज्म के कारण भी पल्स रेट कम हो जाता है। हमारे ब्लड में कितने प्रतिशत ऑक्सीजन होता है उसे ऑक्सीजन सैचुरेशन या spo2 कहा जाता हैl स्वस्थ व्यक्ति में spo2 की नॉर्मल वैल्यू 96% — 99% होती है|

Spo2 90% से नीचे जाने पर उसे स्थिति को हाइपोक्सिया कहते हैंl व्यायाम करके, ताजी और अच्छी हवा में रहकर, भोजन का अच्छे से ध्यान रखकर, गहरी सांस लेकर अब खून में ऑक्सीजन लेवल बढ़ा सकते हैं।

हृदय और फेफड़ों से संबंधित बीमारियों में spo2 कम हो सकता हैl जैसे कि हृदय से संबंधित बीमारी जैसे कि अस्थमा, सीओपीडी, ILD, ब्रोंकाइटिस, Emphysema में कम हो सकता है।

हाई एल्टीट्यूड पर जाने के कारण भी कभी-कभी spo2 कम हो सकता है।

ऑक्सीजन के बिना हार्ट, ब्रेन, लीवर और शरीर के बाकी ऑर्गन डैमेज हो सकते हैंl ऐसे वक्त में ऑक्सीजन कम होने पर बाहर से आक्सीजन देने की जरूरत पड़ती है।

SPo2 कम होने के लक्षण

शरीर में ऑक्सीजन की कमी होने पर सांस लेने में दिक्कत होने लगती है। हृदय की गति तेज हो जाती है। दिल तेजी से धड़कने लगता है खासी आने लगती है। कन्फ्यूजन होने लगता है, पसीना आ सकता हैl त्वचा का रंग बदलने लगता हैl शरीर की त्वचा नीली दिखने लगती है।Tongue और नाखून में बदलाव जल्दी देखने को मिलते हैं।

पल्स ऑक्सीमीटर

पल्स ऑक्सीमीट्री मशीन के जरिए हम पल्स और ऑक्सीजन लेवल को देख सकते हैं। यह एक डिवाइस होता हैl शरीर के किसी भी एक अंगुली पर लगाने से उसकी वैल्यू हमें दिखाई देती है। इसे लगाने से कोई करंट पास नहीं होता है या फिर दर्द भी नहीं होता| हॉस्पिटल में अलग-अलग तरह के पल्स ऑक्सीमीटर देखने को मिलते हैं।

हम आज करेंगे BPL Medical technologes के’ Smart OXYLITE Pulse oxymeter’ के बारे में यह एक बहुत ही छोटा और पोर्टेबल डिवाइस होता है जो बैटरी सेल पर चलता है। इसे इस्तेमाल करना बहुत ही आसान है|

सिर्फ इसमें 1 फिंगर को आपको Insert करना है और इसमें बीच में एक बटन होता है इसे दबाना है फिर इसमें रीडिंग आना शुरू हो जाएगा।

इस लिंक के जरिए खरीद सकते हैं। अगर आप इससे ऑनलाइन खरीदते हैं तो इसकी ओरिजिनल प्राइस से कहीं ज्यादा डिस्काउंट आपको मिल जाएगा।

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