पीरियड्स के दिनों में खुद का ख़याल कैसे रखे

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१० -१२ साल से लड़कियों को पीरियड्स आना शुरू हो जाता है | कई बार कुछ लड़कियों को पीरियड्स के बारे में कुछ भी पता नहीं होता |

जिन लड़कियों को इसके बारे में कुछ पता नहीं होता ऐसी लड़किया पीरियड्स आने पर पर डर जाती है ऐसे समय में क्या करना है किससे पूछना है उन्हें कुछ समझ नहीं आता | इसलिए लडकियोंको पहले से ही इसके बारे में जानकारी देना जरुरी है | 

हर माँ का अपनी बेटी को पीरियड्स की जानकारी देना कर्तव्य है | इसके साथ ही पीरियड्स में खुद का खयाल कैसे रखना है इसके बारे में भी जानकारी देना बहुत जरुरी है |

कुछ लड़कियों को या महिलाओं को पीरियड्स के दौरान पेट के निचले हिस्से में बहुत ही तेज दर्द होता है, किसी को कमर दर्द की समस्या भी होने लगती है, इसके अलावा कुछ महिलाओं को पीरियड्स कब आये इसका पता भी नहीं चलता, उन्हें बिल्कुल भी दर्द नहीं होता |  

जिन महिलाओं को पीरियड्स में ज्यादा दर्द होता है उन्हें दर्द को कम करने के लिए लिए आराम करना बहुत जरुरी है |कुछ महिलाये दर्द से छुटकारा पाने के लिए पैन किलर्स दवाओं का सेवन करती है |

पैन किलर्स का ज्यादा सेवन करने से किडनी पर बुरा असर पड़ता है, इससे किडनी  ख़राब होने लगती है | इसलिए सबसे पहले हर महिला को पैन किलर्स से दूर रहना बहुत जरुरी है|

दर्द को दूर करने के लिए आप गर्म पानी की थैली से पेट की कमर की सिकाई कर सकते है | या फिर आप गर्म पानी से नहा सकते है | पीरियड्स के दिनों में शरीर की सफाई करने के लिए  दिन में दो बार नहाना जरुरी है , इससे शरीर से दुर्गन्ध भी नहीं आती और फ्रेश भी लगता है| 

पीरियड्स के लिए इस्तमाल किये जाने वाले सेनेटरी नैपकिन को ४ घंटे में बदलना बहुत जरुरी है |  अगर आपको बहुत कम ब्लीडिंग होती है तो भी ऐसे ४ घंटे में एक बार बदलना बहुत जरुरी है |

लम्बे समय तक नैपकिन ना बदलने  से इन्फेक्शन होने का खतरा निर्माण हो जाता है, शरीर से बदबू आने लगती है | कई बार इससे गर्भाशय से जुड़े किसी अवयव का कैंसर होने की आशंका बढ़ जाती है | 

कुछ महिलाये सेनेटरी नैपकिन के अलावा कपड़ें का इस्तमाल करती है, लेकिन ये भी गलत बात है, कपड़ें के इस्तमाल से भी इन्फेक्शन होने के चान्स बहुत ज्यादा होते है, कई बार शरम के कारण महिलाएं घर में ही कपड़े सुखाती है, कपड़ों को धूप न मिलने के कारण कपड़े गीले रह जाते है जिससे फंगल या यीस्ट इन्फेक्शन हो जाता है |

इसलिए हमेशा नैपकिन का ही इस्तमाल करना जरुरी है |अच्छा वाला सेनेटरी पैड आपको यहां मिलेगा। आजकल टैम्पॉन भी उपलब्ध है उसका भी इस्तमाल कर  सकते है |

Wrong Things Happen During Periods

पीरियड्स के लिए हर महिला के पास अलग इनर होना जरुरी है | हर बार पेशाब करने के बाद योनि को पानी से साफ करना बहुत जरुरी है | पीरियड्स के दिनों में हर ४ घंटे में पानी से अच्छी तरह से योनि की सफाई करे |

हर रोज दिन में २ बार V Wash लगाकर योनि की सफाई करे | V Wash को खरीदने के लिए इस लिंक को क्लिक करे। पीरियड्स के दिनों में ज्यादा ट्रैवेलिंग बिल्कुल भी ना करे | पीरियड्स के दिनों में ज्यादा भारी वजन भी नहीं उठाना चाहिए|  इससे ज्यादा ब्लीडिंग होने के चान्स होते है | 

पीरियड्स के दिनों में कच्चे प्याज का सेवन नहीं करना चाहिए इससे शरीर से बदबू आ सकती है | साथ ही इन दिनों में ज्यादा गर्म चीजे जैसे पपीता, कॉफ़ी का बहुत कम सेवन करना चाहिए |

पीरियड्स के दिनों में शरीर से ख़राब खून निकल जाता है,  इसके अलावा महिलाओं को हररोज ढ़ेर सारा काम भी करना पड़ता है इसलिये हर महिला का हीमोग्लोबिन ११ से ऊपर होना जरुरी है | 

हीमोग्लोबिन अच्छा रहने पर महिला काम करते समय थकेगी नहीं, पीरियड्स में कमजोरी नहीं आएगी पीरियड्स के दौरान दर्द भी बहुत कम होगा | हीमोग्लोबिन को बढ़ाने के लिए भोजन में सहजन, पालक, चुकंदर, गुड़ मूंगफली, ख़जूर का  सेवन करना बहुत जरुरी है | इन ५ में से एक चीज तो हर रोज महिला के खाने में होनी चाहिए |

इसके अलावा हर रोज भरपूर पानी का भी सेवन करना जरुरी है | पीरियड्स के दिनों में कभी कभी हार्मोनल परिवर्तन के कारण स्वभाव में बदलाव हो जाता है |  

चिड़चिड़ापन बढ़ जाता है, बार बार गुस्सा आ जाता है इसके अलावा कोई महिला बहुत ही शांत रहती है |

ये सभी चीजे पीरियड्स खत्म होने के बाद पहले जैसी हो जाती है, लेकिन महिलाओं में होने वाले इन बदलाव को घर के बाकि लोगों समझ लेने चाहिए और उसका ख्याल रखना चाहिए | पीरियड्स के दिनों में कभी भी शारीरिक संबंध नहीं बनाने चाहिए | 

कभी कभी कुछ महिलाओं को पीरियड्स के दौरान loose  motion की समस्या हो जाती है लेकिन इसके लिए आपको कुछ मेडिसिन लेने की जरूरत नहीं है ज्यादातर ये समस्या अपने आप ठीक हो जाती है |

प्रेगनेंसी के अलावा पीरियड मिस होने के कारण

अधिक वजन या मोटापे के कारण पीरियड्स अनियमित हो सकते हैं | मोटापे के कारण हार्मोन सही ढंग से कार्य नहीं कर पाते, जिसके कारण पीरियड मिस हो सकते हैं |

कुछ लड़कियां और महिलाएं बहुत दुबली पतली होती है | बहुत ही कम वजन होना पीरियड्स की प्रॉब्लम के लिए जिम्मेदार होता है क्योंकि उनका शरीर उचित मात्रा में एस्ट्रोजन नहीं बना पाता इस कारण उनका पीरियड साइकिल ठीक से नहीं हो पाता |

गर्भनिरोधक गोलियों का सेवन भी मासिक चक्र को डिस्टर्ब कर सकता है | कई बार हमें थायराइड की परेशानी होती है और हमें उसका पता भी नहीं चलता |

हाइपोथाइरॉएडिज्म आपकी मानसिकता अनियमित कर सकता है | इस से असंतुलन हो सकता है जिसके कारण कई महिलाओं को पीरियड प्रॉब्लम हो सकती है | ऐसी समस्या में पीरियड्स लेट आते हैं | जो महिलाएं रजोनिवृत्ति यानी मेनोपॉज की ओर बढ़ रही होती है उनमें मासिक चक्र अनियमित होता है |

कुछ लोग लंबे चलते हैं और उनके कारण पीरियड्स लेट होना एक आम बात है | थायराइड, कैंसर, कीमोथेरेपी, डिप्रेशन, मानसिक रोगों के लिए दी जाने वाली दवाइयां और कॉर्टिकोस्टेरॉइड जैसी दवाइयां मासिक चक्र को अनियमित कर सकती है |

मानसिक तनाव, चिंता का असर सीधा आपके हार्मोन लेवल पर पड़ता है, जिसके कारण मासिक धर्म अनियमित हो सकता है | कई महिलाओं में स्तनपान के समय पीरियड्स लेट या मिस हो सकते हैं |

मासिक धर्म के समय दर्द

महिलाओं के लिए मासिक धर्म एक बहुत ही महत्वपूर्ण बात होती है।

मासिक धर्म के दौरान बहुत ही सावधानियां रखनी पड़ती है |

कुछ चीजें होती है जो मासिक धर्म के दौरान ही करनी चाहिए |

मासिक धर्म के दौरान अगर हम गलतियां करते हैं तो हमें बहुत नुकसान हो सकता है।

ज्यादा कॉफी पीना – मासिक धर्म के दौरान ज्यादा मात्रा में कॉफी पीने से बॉडी डी हाइड्रेट हो जाती है।

इससे पेट दर्द की तकलीफ और बढ़ जाती है |

पर्याप्त नींद न लेना – मासिक धर्म के दौरान कम से कम 8 घंटे की नींद लेने से बॉडी रिलैक्स हो पाती है |

ऐसे में सिर दर्द और बॉडी पेन से प्रॉब्लम होने लगती है।

ज्यादा एक्सरसाइज करना – मासिक धर्म के दौरान ज्यादा हैवी एक्सरसाइज या योगा करने से बॉडी का ब्लड सर्कुलेशन बढ़ जाता है |

ऐसे में पेट दर्द होने लगती है |

इसलिए बहुत ही हल्की एक्सरसाइज करें |

फास्ट फूड खाना जैसे कि सैंडविच, बर्गर, पिज्जा या फास्ट फूड खाने से बॉडी को जरूरी विटामिन और मिनरल नहीं मिल पाते |

ऐसे में बॉडी में कमजोरी आने लगती है | हेवी वर्क आउट के दौरान मासिक धर्म के दौरान बॉडी में काफी कमजोरी आ जाती है।

ऐसे में हैवी वर्क करने से पेट और कमर दर्द की प्रॉब्लम बढ़ सकती है।

मासिक धर्म के दौरान बॉडी का ध्यान न रखने से कई हेल्थ प्रॉब्लम हो सकती है।

सैनिटरी नैपकिन को हर 5 घंटे में बदलना जरूरी होता है। ऐसा करने से बैक्टीरियल इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है।

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