पेड को बचाना जरूरी है।

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अकेलेपन का साथी होते है पेड | जिंदगी में असली दोस्त होते है पेड़ | कभी ना करना अपने दोस्त से गद्दारी

क्यूकीं  यही एक है जो बिना किसी उम्मीद से सिर्फ आपको देते है | बाकि इंसान तो बिना मतलब किसी को कुछ  देता नहीं है | वो तो सिर्फ दूसरों से लेना जानता है …

दोस्तों इस धरती को हम सुंदरता की मूर्ति कहते है | पर क्या आप जानते है इसकी सुंदरता का असली राज कौन है? ये बेचारे पेड सजीव तो है पर बोल  नहीं सकते | इसलिए तो लोग उनपे कुल्हाड़ी चलाते है | उन्हें भी तकलीफ़ होती है जब उनके एक एक डाली को काट लिया जाता है |

इंसान के जिंदगी में जैसे हर एक अवयव को महत्व है, एक भी अवयव ख़राब हुआ या उसे निकालना पड़ा तो उसकी जिंदगी बिखर जाती है | फिर पेड भी तो जिन्दा है अगर उसकी डाली कोई काट ले तो उसको भी दर्द होता है|

इंसान के शरीर पर एक खरोंच भी आती है तो उसके लिए मर्मपट्टी लगवाता है | कभी सोचा है जब लोग पेड़ पर अपना नाम लिखवाते है  तब उसको भी कितना दर्द होता होगा…

पेड़ पौधे हमारे सृष्टि की असली सम्पत्ति है | लोग समज़ते नहीं है लेकिन इस पर ही हमारी जिंदगी निर्भर है | सभी  सजीवों को जिंदा रहने के लिए ऑक्सीजन की जरूरत होती | ऑक्सीजन के बिना कोई भी जीव जिन्दा नहीं रह सकता | ये पेड़ तो हमे ढेर सारा ऑक्सीजन मुफ्त में देते है | मुफ्त में मिलने के कारण लोगों को उसकी कदर नहीं है | 

ऑक्सीजन की कीमत तो उन लोगों से पूछिए जिनके फेफड़े खराब हो चुके है | सृष्टि में ऑक्सीजन फ्री में है पर उन्हें १० कदम chalne के  लिए भी O2 की जरूरत पड़ती है जिसके लिए ढेर सारे पैसे खर्च करने पड़ते है | हर एक इंसान तो इतना आमिर नहीं है जो पैसे देकर साँस ले |

इसलिए  प्रकृति ने जो हमे  मुफ्त में दिया है उसकी कदर करना सिख लो | सोच लो आपके फेफडे बंद पड़ गए तो आप जिन्दा कैसे रहोगे | अगर  पेड काटोगे तो ये चीज होने में भी वक्त नहीं लगेगा…

इंसान खुद को राजा समझता है किसी से डरता नहीं है खुद की मनमानी करता है, बेवजह पेड़ काटता है इसलिए तो प्रकृति कभी कभी अपना रुख बदलती है और इंसान को डराती है | 

इस  सृष्टि में होनेवाले विनाश के लिए सिर्फ इंसान जिम्मेदार है | इंसान भूल जाता है इस धरती पर उसके साथ साथ और  कई जीव रहते है जो बोल नहीं सकते पर जीना चाहते है | 

इंसान  के कुकर्मों  के कारण धरती पर बार बार सकंट आता है | इंसान पेड़ काटता है जंगलो को नष्ट करता है जिसके कारण थोड़ी  बारिश के बाद नदिया तेजी से बहने लगती है | पेड़ जमीन पर रहकर पानी को जमीन के अंदर रोखकर रखते है |  

पेड पौधे ना रहने के कारण जंगलो का सारा पानी नदी की तरफ बह जाता है और नदी का पानी लोगों के घरों में घुस जाता है | जिसमे फिर एक बार इंसान के पापो की सजा उसके साथ साथ कई एक निष्पाप जीवो को सहन करनी पड़ती है | कभी सोचा है बाढ़ में बह गए उन मासूम जानवरों की क्या हालत होती होगी | अरे इंसान तो सबसे बुद्धिमान प्राणी है बाढ़ आयी है तो पानी में नहीं जाना जानता है डूबने लगे तो बचाने  के लिए चिल्लाना है ये सब उसे पता है पर पशु पक्षी तो ना समझदार होते है वो तो ये सब नहीं जानते | देख इंसान ये तेरे ही पापों की सजा है जिसके के लिए कोई निष्पाप चला गया | अब तो अपनी गलती मान ले, पेड काटने से पहले पेड़ लगाना सिख ले

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