प्रदूषण का सबसे बड़ा लेख

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इस आधुनिक युग में मानव ने बहुत सारी प्रगती कर ली है। दिमाग के बलबूते पर उसको जो चाहिए उसने हासिल कर लिया है और वो अभी भी काफी महत्वकांशी है। विज्ञानं के इस युग में आगे बढ़ते रहना काफी अच्छी बात है लेकिन, इसी विज्ञानं के कारन मानव जाती को कुछ अभिशाप भी मिले है। प्रदूषण उन अभिशाप में सबसे पहले नंबर पे आता है। मानव जात इस भयावह चीज से काफी परेशान है, हर दिन काफी सारे लोग बड़ी बड़ी संस्थाए इस विषयपर काम कर रही है लेकिन, तेजीसे होने वाले भौतिक बदलाव के कारन उनके प्रयास कम पड रहे है। मनुष्य के लिए इस प्रकार के प्रदुषण छोटी बीमारी से लेकर बड़ी बड़ी नैसर्गिक आपत्ति भी सामने खड़ी कर देती है।

प्रदूषण का सरल भाषा में अर्थ

“कुदरत से मिली सभी शुद्ध चीजोंमे मानव जाती के कारन होने वाले हस्तक्षेप से उन चीजोंका मूल्य घट जाना इसे प्रदुषण कहते है”। जैसे की साँस लेने के लिए अशुद्ध हवा मिलना, पानी का अशुद्ध होना, शांत वातावरण का नाश होना, खाने की चीजोंसे पोषक तत्व कम हो जाना इत्यादि।

प्रदुषण के बहुत सारे प्रकार होते है लेकिन उनमेसे प्रमुख तीन है
१) वायु प्रदुषण
२) जल प्रदुषण
३) ध्वनि प्रदुषण

अगर आम लोगोंकी बात करे तो उन्हें प्रदुषण कहने पर सिर्फ वायु प्रदुषण ही जेहन में आता है। चलिए एक एक करके हम इन प्रकारोंके बारे में जानते है।

वायु प्रदूषण –

कुदरत से मिली शुद्ध हवा दूषित हो जाना इसे हम वायु प्रदुषण कहते है। मानव मूल रूप से दो जगहोंपे रहता है या तो गांव में या फिर शहर में।गांव के मुकाबले वायु प्रदुषण शहर के जगह पर ज्यादा मात्रा में होता है। प्रमुख तीनो प्रकार में वायु प्रदूषण को सबसे खतरनाक माना जाता है, क्योंकि यह सबसे तेज फैलने वाला प्रदुषण है।

ज्यादातर बड़े बड़े कारखाने और इंडस्ट्रीज शहरोमे होते है, इसकी वजह से उनसे निकला हुआ वायु पुरे शहर के वातावरण में घुलमिल जाता है। शहरो तथा महानगरोंमे बड़ी मात्रा में मोटरसायकल, कार, बसेस आदि पाए जाते है, उनसे निकलने वाला कार्बन मोनोक्सीड वातावरण में मिल जाता है और प्रदुषण बढ़ता है। यहा पर आपको और एक चीज पर गौर करना होगा, शहर में ज्यादा लोग होने के कारन वहा पे जमीन की काफी जरूरत होती है। ज्यादा जमीन के हव्यास में लोग शहर के आस पास के जंगल काट देते है, उसके कारन वायु प्रदूषण को रोकने वाले पेड़ भी नष्ट हो जाते है। शहर में कुछ लोग होते है जो इस प्रदुषण को रोकने के लिए पेड़ पौधे लगाते है लेकिन, जितनी तेजीसे गाड़िया और कारखाने बढ़ रहे है उनके सामने उन चंद लोगोंका काम फीका पड रहा है।

चिड़िया खतरेमें

वायु प्रदुषण बेहद हानिकारक है, इसके वजह से शहरोमे चिड़िया ख़त्म हो गई है। बाकि उड़ने वाले पंछी भी धीरे धीरे कम हो रहे है। आपने देखा होगा शहर में पाने वाले पेड़ भी मुरझाये हुए दीखते है। मानव जाती पर काफी बुरा असर पड रहा है, पहले जमाने में लोगोंकी आयु १०० साल तक थी आज के समय में वह घट कर ६० साल हो गई है। हस्पताल में अगर आप देखोगे तो सबसे ज्यादा बीमार लोग आपको रेस्पिरेटरी के ही मिलेंगे।
मानव शरीर इन घातक वायु का सामना नहीं कर सकता उसे आसानीसे फेफडोंके रोग हो सकते है। आज के समय में सिगरेट से ज्यादा तो मौते वायु प्रदुषण से हो रही है। वायु प्रदूषण से बचने के लिए आपको पोल्लुशण मास्क (Pollution Mask) खरीदना पड सकता है।

जिस ग्लोबल वार्मिंग की हम बात करते है उसका प्रमुख कारन वायु प्रदुषण ही है। इसके कारन कुदरत के ऋतु का साईकल भी गड़बड़ा गया है। ऑस्ट्रेलिया में कभी भी ४० डिग्री पे तापमान नहीं जाता लेकिन, गर्मियोंके दिनोमे अब उतना जाने लगा है। बारिश का भी कोई ठीक समय नहीं रहा है। इसके कारन खेती करने वाले किसानो पे बुरा असर पड रहा है, उनकी फसल ठीक से पैदा नहीं हो पाती और जितना चाहिए उतना पिक वो नहीं निकाल पाते। कुछ किसान लालच में आकर फसल को ज्यादा मात्रा में केमिकल दे बैठते है और उससे मानव जाती की काफी हानि होती है।

जल प्रदूषण –

जल प्रदुषण से कोई नहीं बच पाया है। गांव और बड़े बड़े शहर भी इसका शिकार है। ” कुदरत से मिले हुए स्वच्छ बारिश के पानी में धरती पे मौजूद चीजे घुलमिल जाने से होने वाले प्रदुषण को जल प्रदुषण कहते है। ” बारिश का पानी धरती पे गिरने के बाद, जमीन की मिटटी उसे सोक लेती है। बचा हूआ पानी बहने लगता है, और किसी झरनो में या फिर नदियोमे मिल जाता है। नदिया आगे जाके समुंदर में शामिल हो जाती है। ज्यादा पेड़ काटने से जमीन की सतह पर जो मिटटी होती है, वो मिटटी ढीली हो जाती है। बारिश के समय मै यही मिटटी पानी को सोकने के बजह उसके साथ बेहने लगती है। इससे सारा पानी समुंदर को चला जा है और कुए में पानी जमा नहीं हो पाता।

शहरोमे पेड़ को काटने के साथ साथ सीमेंट के रोड भी बनाये जाते है उसके कारन सारा पानी बह जाता है। घरोमे से निकलने वाला सांडपाणी और कारखाने से निकलने वाला केमिकलयुक्त पानी कोई प्रोसेस किये बिना नदियोंमें छोड़ा जाता है। उससे बड़ी मात्रा में जल प्रदुषण हो जाता है। इसीलिए शहर में लोग स्वच्छ पानी की बोतल खरीदते है।

कुछ कारखाने का पानी तो इतना गर्म और जहरीला होता है की नदी में मौजूत बहुत सारे जिव अपनी जान गवा देते है। दूषित गंगा के बारे में आप खबरोमे पढ़ते ही होंगे।

गांव की हालत

गांव में खेती करने वाला किसान लालच के कारन बड़ी मात्रा में केमिकल को फसल पे स्प्रे करता है। बारिश से पानी के साथ वह केमिकल भी मिल जाता है और जल प्रदूषण होता है। गांव की महिलाये बर्तन और कपडोंको नदी के पानी में ही साफ करती है इससे प्रदुषण और बढ़ता है। सरकार जब भी किसी नदी को साफ करने को लेता है तब उन्हें उनमेसे प्लास्टिक, रसायन, और नॉन बायोडिग्रेडेबल चीजे मिल जाती है। किसान अपने जानवर नदी के पानी में ही धो देते है और खुद भी वही पे नहाते है इससे उनको बीमारी होने की सम्भावना बढ़ जाती है। गांव के लोग नदी के बगल में ही शौच कर देते है इसके कारण पीलिया जैसी खतरनाक बीमारी फ़ैल सकती है।

ध्वनि प्रदूषण –

गांव के तुलना में शहर में आपको ध्वनि प्रदुषण ज्यादा सुनने को मिलेगा। ” कुदरत में पाए जाने वाले शांत वातावरण में अलग अलग प्रकार के बेसुरे आवाज शामिल होने से ध्वनि प्रदुषण होता है।” शहरो में जो चीजे वायु प्रदूषण के लिए जिम्मेदार है वही चीजे भी इसके लिए जिम्मेदार है, जैसे की गाडियोंके और कारख़ानोंके आवाज। शहर में पाए जाने वाले एयर पोर्ट भी ध्वनि प्रदुषण का मुख्य कारन है। नई नई तकनीक के कारन डॉल्बी सिस्टम भी काफी प्रगत होने लगी है, इसके कारन इस प्रदुषण में बढ़ोतरी हो रही है। शादी बारात में या फिर बड़े फंक्शन में ख़ुशी जताने के लिए लोग साउंड सिस्टम का इस्तेमाल करते है। उसके कारन चंद लोगोंकी ख़ुशी के कारन आस पास के हजारो लोगोंकी दिनचर्या ख़राब हो जाती है।

कुछ लोग ऐसी बड़ी डॉल्बी के नजदीक जाके अपनी ख़ुशी जाहिर करते है लेकिन, अगली बार कुछ खुश खबरी सुनाने के लिए भी उनको चिल्लाके बताना पड़ता है। दिवाली में बजने वाले फटाकोंसे ध्वनि और वायु प्रदूषण बड़ी मात्रा में हो रहा है। इलेक्शन के प्रचार के समय नेता लोगोंको काम के बजह गाने सुनाने में ज्यादा रूचि होती है और एकदूसरे से स्पर्धा करने के चक्कर में मतदाता को ही ध्वनि प्रदूषण से परेशान करते है। हमारे मानसिक तनाव का प्रमुख कारन ध्वनि प्रदुषण है। इसके वजह से हम काम पे ध्यान केंद्रित नहीं कर सकते। दिमाग के सोचने वाली शक्ति पे ध्वनि प्रदूषण काफी बुरा असर कर देता है। आयुर्वेदा का फेसबुक पेज लाइक करना मत भूलना।

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