प्रसव के लक्षण

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जैसे ही डिलीवरी की तारीख नजदीक आती है । गर्भवती महिला को अधिक तेज और बार बार पेशाब लगती है । बच्चे का सिर मूत्राशय के नजदीक आने के कारण उस पर दबाव पड़ता है, और बार-बार पेशाब लगती है । प्रसव का समय नजदीक आते ही कमर के निचले हिस्से में दर्द शुरू हो जाता है।

प्रसव का समय नजदीक आते ही महिला के योनि में सफेद या पीला स्राव अधिक मात्रा में निकलने लगता है । डिलीवरी के पहले महिला के गर्भाशय का संकुचन यानी कि गर्भाशय मजबूत हो जाता है। जिसकी वजह से लगातार पेट और शरीर में ऐठन बनी रहती है। अंत में हलचल महसूस होना और बार बार दस्त होना इस बात का संकेत है कि आपके डिलीवरी का समय नजदीक आ चुका है।

लगभग 10% महिलाओं को पानी की थैली टूटने का अनुभव होता है। सामान्य रूप से यह तब होता है जब लेबर पेन शुरू हो जाता है तो यह डिलीवरी का संकेत हो सकता है। डिलीवरी से पहले महिला की योनि से खून स्राव होता है।

इस दौरान शिशु का सिर श्रोणि गुहा तक आ चुका होता है । इस कारण गर्भाशय के मुख की छोटी-छोटी रक्त वाहिनी टूट जाती है । जिसकी वजह से योनि से खून स्त्राव होने लगता है | प्रसव से पहले पेट के आसपास के क्षेत्रों में खुजली के साथ-साथ जलन का अनुभव होता है।

नौवें महीने के अंतिम हफ्ते में महिला के स्तन में तेज पीड़ा होती है । डिलीवरी का समय नजदीक आते ही थोड़ी देर के लिए गर्भवती महिला खुद को बहुत ऊर्जावान महसूस करती है, तो अगले ही क्षण उसे थकान का भी अनुभव होने लगता है |

नॉर्मल डिलीवरी का सबसे बड़ा लक्षण यह है कि, प्रेग्नेंसी के नौवें महीने में कदम रखते ही बैठ के आसपास के क्षेत्र से खिसक कर बचा निचले हिस्से में आ जाता है। इसे गर्भवती महिला को यह पता चलता है उससे कुछ दिनों में कुल लेबर पेन शुरू होने वाला है । यह डिलीवरी के 2 से 4 हफ्ते पहले होता है ।

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