बारिश का मौसम

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तीन ऋतु में से बारिश का मौसम एक है। रिमझिम बारिश में भीगने में काफी ज्यादा मजा आता है। गर्मियोंके दिन के बाद बारिश के दिन शुरू होते है। आसमानसे धरतीपर पानी गिरनेसे मनुष्यजाति और पेड़पौधोंको काफी फायदा होता है। पानी गिरनेसे धरती साफ हो जाती है, और यह पानी को सोक भी लेती है जिससे वातावरण में नमी पैदा होती है। इन दिनों बच्चे कागज के नाव से खेलते है। किसान का भी खेतो में काम बढ़ जाता है। कोई भी चीज हद से ज्यादा बुरी होती है, बारिश का वैसे ही है ज्यादा बारिश के कारन फसल का नुकसान होता है। जब बारिश विशाल रूप धारण कर लेती है तब बहुत तबाही साथ लेके आती है।

बारिश का जलचक्र –

जब नदिया और झील के पानी पे सूरज के तीव्र किरण पड़ते है तब पानी की भाप होने लगती है। यह भाप आम वातावरण से वजन में हलकी होती है, इसीलिए ऊपर ऊपर जाने लगती है। लगभग १५ किलोमीटर ऊपर जाने के बाद यह भाप जमने शुरू होती है। पूरी तरह जमने के बाद इस भाप का रूपांतर बादल में होता है। आगे जाके यह बादल एकदूसरे से टकराते है और पानी के छोटे छोटे बूंदो में निचे गिरने लगते है उसे हम बारिश कहते है।

आगे जाके यह बादल एकदूसरे से टकराते है और पानी के छोटे छोटे बूंदो में निचे गिरने लगते है उसे हम बारिश कहते है। कई बार आपने सुना होगा की बादल फट गए, तो आपके जानकारी के लिए बता दूँ की बारिश का पानी बून्द बून्द गिरने के बजह तेजीसे इक्कट्ठा गिरने लगता है।

यह पानी का जलचक्र हमे सूचित करता है की धरती का पानी कभी भी ख़त्म होने वाला नहीं है। जो पानी पहले समय में डाइनोसॉर्स पीते थे आज हम वही पानी इस जलचक्र के कारन पि रहे है। हमरे अगली पीढ़ी भी यही पानी पीयेगी, तो इस धरती पे पानी ख़त्म होगा इस बात से डरना बंद करदो। हाँ लेकिन पानी का हद से ज्यादा उपयोग हमे इसकी जरूरत बढ़ने का एहसास जरूर करा देगा।

पृथ्वी पर पानी

आपके जानकारी के लिए बता दूँ की पृथ्वी पर ७१% पानी है और बची हुयी जमीन है। भगवदगीता में कहा गया है की, हम सब इसी धरती माँ के संतान है। इसिलए हमारे शरीर में भी पानी की मात्रा ७१% ही है। यह पर सिर्फ इतनी बात करनी है की, हम जाने या न जाने लेकिन पुरातन ग्रंथोमे लिखी हुयी बातोंमे कुछ न कुछ राज हमे जरूर मिलता है।

बारिश में हद से ज्यादा भीगने पर आपको खांसी और जुखाम जैसी बीमारी हो सकती है इसिलए यह वीडियो जरूर देखो।

बारिश में मछली

कहि जगह पर आपने सुना होगा की बारिश के समय आसमान से मछली गिरी। बहुत जगह पर मेंढक भी गिरे। लोगोने इसके बहुत सरे अर्थ लगाए, लेकिन उस चीज का असली कारन तूफान है। जब समुन्दर के अंदर विशाल तूफान खड़ा होता है और उसके साथ समुंदर का पानी भी जोर जोर से घूमने लगता है। उसके साथ मछलिया बादल में अटक जाती है और हवा के साथ बादल बह के जमीन पर बरसात शुरू कर देता है। उस बरसात में मछलिया भी गिरती है।

जैसे की हमने ऊपर बात की धरती पानी कभी ख़त्म नहीं हो सकता, यह बात सच है लेकिन मनुष्य के ज्यादा हस्तक्षेप के कारन इंडस्ट्री और घरोंका गंधा पानी नदियोंमें छोड़ने के कारन हमारी नदिया प्रदूषित हो रही है। कही जगहोंपे सूखा पड़ना और अचानक बाढ आना ये उसी प्रदुषण की देन है।

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