महिलाओंमे हार्मोन असंतुलन के कारन लक्षण और इलाज।

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मानव शरीर में हार्मोन का विशेष महत्व होता है। महिलाओंके शरीर में यौनवस्था शुरू होने से लेकर बच्चे को जन्म देने तक सभी प्रक्रिया हार्मोन्स पर निर्भर करती है। जब रक्तप्रवाह में हार्मोन बहुत कम या फिर बहुत ज्यादा हो जाते है तो उसे हार्मोन असंतुलन कहते है। शारीरिक प्रक्रियांको नियंत्रित रखने के लिए हार्मोन महत्वपूर्ण होते है।

महिला और लड़कियोंमे हार्मोन असंतुलन के विभिन्न प्रकार दिखाई देते है। महिलाओंमे वजन बढना, थकान, त्वचा का शुष्क पड़ना, अचानक वजन घटना, हार्ट रेट धीमा हो जाना, प्यास अधिक लगना, मांस पेशिओंका कमजोर हो जाना, बार बार पेशाब लगना, सेक्स करने की इच्छा में कमी होना, डिप्रेशन जैसे लक्षण दिखाई देते है। 

हार्मोनल असंतुलन के कारन लड़कियोंमे पीरियड्स देर से आना, पीरियड्स के दौरान दर्द होना, बहुत ज्यादा ब्लीडिंग होना ऐसी समस्या आती है।  महिलाओंमे हार्मोन असंतुलन के कारन हड्डिया कमजोर हो जाती है। जिससे आगे जाके ओस्टीओपोरोसिस की समस्या निर्माण हो जाती है।

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शरीर में, मन में, प्राइवेट पार्ट में होने वाले हार्मोनल बदलाव।

लड़कियोंके चेहरे पर मुहासे और दाने निकलना जैसी समस्या दिखाई देती है। योनि में सूखापन, स्तन की कोमलता, भोजन का अपचन, कब्ज डायरिया की समस्या ये सभी हार्मोनल असंतुलन के लक्षण है। 

रात में सोते समय अधिक पसीना आना हार्मोन असंतुलन का प्रमुख लक्षण है। महिलाओमे वजन बढ़ना, बांझपन, बाल कमजोर होना, बाल तेजीसे टूट जाना, आवाज में भारी पन आना यह हार्मोनल असंतुलन के लक्षण है।

लड़किया और महिलाओं के चेहरे, गर्दन, छाती और कमर पे बाल आना यह भी हार्मोन असंतुलन का ही लक्षण है। लड़कियोमे वजयानल अट्रोपी और स्किन टैग्स भी हर्मोन असंतुलन के लक्षण है। हमारे शरीर में मौजूद अंतस्रावी ग्रंथिया एक विशेष कोशिकाएं होती है, जो रक्त में हार्मोन का उत्पादन करती है। उसे जमा करके उसका स्त्राव करती है। शरीर में कई तरह की अंतस्रावी ग्रंथिया पाई जाती है, जो शरीर के विभिन्न अंगोको नियंत्रित करती है।

हार्मोन असंतुलन के कारण

महिलाओंमे हार्मोन असंतुलन के कई सारे कारन होते है, जैसे के लम्बे समय तक तनाव, टाइप १ और टाइप २ डाइबिटीस, हायपोथाईरोडिस्म की समस्या, प्यारा थाइरोइड हार्मोन का कम या जरूरत से ज्यादा उत्पादन होनेपर, पोषक तत्वोंके कमी के कारन, पीछूटरी ग्रंथी में ट्यूमर होने पर, कारटॉसिल हार्मोन अधिक बनने पर, अंतस्रावी ग्रंथी में चोट या घाव क कारन, कई तरह की एल्लेर्जिक रिएक्शन और संक्रमण होने पर, अंतस्रावी ग्रंथियोंमे कैंसर कीमोथेरेपी, रेडिएशन थेरेपी, हार्मोन थेरेपी के कारन, शरीर में आयोडीन की कमी के कारन, गर्भनिरोधक दवा, रजोनिवृति, प्रेगनेंसी, बच्चे को स्तनपान करने के कारन या पॉलीसिस्टिक सिंड्रोम के कारन हार्मोन असंतुलन हो सकता है।

हार्मोन असंतुलन की जाँच करने के लिए ब्लड टेस्ट की जाती है। उसमे थायरोइड, एस्ट्रोजन, कोर्टिसोल के स्तर को जाँच किया जाता है। टूमर, सिस्ट और गांठ की जाँच करने के लिए पेल्विक परीक्षण किया जाता है। अल्ट्रा साउंड के जरिये गर्भाशय थायरोड की जाँच की जाती है। इसके आलावा बाईओप्सी, थायरोड स्कैन, एक्स रे भी किया जाता है।  

जिन महिलाओंमे ऊपर बताये गए लक्षण दिखाई देते है, उन्हें डॉक्टर को दिखाकर इसकी जाँच करवानी होगी। डॉक्टर से बातचीत करके जो भी बीमारी निकलर कर आती है उसका इलाज करे। हार्मोनल असंतुलन में विटामिन B युक्त चीजोंका सेवन करना चाहिए। ब्रोकोली, गोभी, अंकुरित बीज, फूलगोभी हार्मोनल संतुलन में सहायक होते है। इसके आलावा मछली, प्रोटीन युक्त चीजोंका सेवन हार्मोनल सतुंलन में मदद करता है। 

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