शरीर का तापमान

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मनुष्य शरीर का सामान्य तापमान याने की नार्मल टेंपरेचर 37 डिग्री सेल्सियस या 98.6 डिग्री फारेनहाइट होता है | जब शरीर का तापमान सामान्य से ऊपर जाता है तो इस स्थिति को ज्वर, बुखार या फीवर कहते हैं। इसके अलावा अगर तापमान सामान्य स्तर से नीचे जाता है तो इस स्थिति को हाइपोथर्मिया कहते हैं |

शरीर का तापमान मापने के लिए थर्मामीटर का उपयोग किया जाता है। शरीर का तापमान हम चार जगह से माप सकते हैं। हर जगह का तापमान अलग अलग होता है।

Axilla याने बगल का सामान्य तापमान 96.6df – 98df या 35.9dc – 36.7dc होता है |

Mouth याने मुख का सामान्य तापमान 98.6df या 37dc होता हैl

Ear याने कान का सामान्य तापमान 99.6df या 37.6dc होता हैl

Rectum याने गुद का सामान्य तापमान 99.6df या 37.6 dc होता हैl

बगल का तापमान मुख तापमान से हमेशा कम रहता है l गुदभाग का सामान्य तापमान सबसे ज्यादा एक्यूरेट आता है। लेकिन जिन लोगों की गुदभाग की शस्त्रक्रिया हुई है। जिन लोगों को गुदभाग की कोई बीमारी है। हेमोरॉयड्स और पाइल्स से परेशान लोग, जिन लोगों को अतिसार हुआ है या फिर जिन लोगों को रक्त की गुठली बनने की बीमारी है ऐसे लोगों में गुदभाग का तापमान नहीं लेना चाहिए l

छोटी उम्र के बच्चों में गुदभाग का तापमान नहीं लेना चाहिए। 80 वर्ष से अधिक उम्र के व्यक्ति का गुदभाग का तापमान नहीं लेना चाहिए। जिन लोगों को खून पतला करने की दवाई शुरू ह, ऐसे लोगों का भी गुदभाग का तापमान नहीं लेना चाहिए।

जिन महिलाओं की वजाइनल सर्जरी हुई है या जिन पुरुषों की प्रोस्टेट सर्जरी हुई है। ऐसे लोगों का भी रेक्टल(गुदभाग) टेंपरेचर नहीं लेना चाहिएl जिन लोगों को दिल से संबंधित बीमारीया हैl ऐसे लोगों में भी गुदभाग का तापमान नहीं लेना चाहिए।

जिन लोगों की ओरल सर्जरी हुई है, ऐसे लोगों में ओरल टेंपरेचर नहीं देखना चाहिए। जिन लोगों को खासी, उल्टी, मतली की समस्या है, ऐसे लोगों में भी मुख का तापमान नहीं लेना चाहिए। जिन लोगों के मुंह में ओरोफैरिंजीयल एयरवे है, या नाक मैंने Naso फैरिंजीयल ट्यूब है या नसोगैस्ट्रिक ट्यूब है, जिनके मुंह पर ऑक्सीजन मास्क या वेंटिलेटर मास्क लगाया है | या फिर मुंह में एंडो tracheal ट्यूब है तो ऐसे लोगों में भी मुख का तापमान नहीं लेना चाहिए।

अगर किसी को फिट्स आते हैं तो ऐसे समय में भी मुख का तापमान नहीं लेना चाहिए। अगर कोई व्यक्ति अनकॉन्शियस या सेमीकॉन्शियस या बहुत ज्यादा रेस्टलेस, कन्फ्यूज्ड है तो ऐसे समय में भी मुख का तापमान नहीं लेना चाहिए l

छोटे बच्चे या नवजात बच्चों में भी मुख भाग का तापमान नहीं लेना चाहिए। अगर किसी व्यक्ति को नाक से सांस लेने में परेशानी हो रही है, या सांस पूरी नहीं मिल रही है। उसको सांस लेने के लिए मुंह खोलना पड़ता है तो ऐसे वक्त में भी मुख भाग का तापमान नहीं लेना चाहिए। अगर किसी व्यक्ति को फेशियल पाल्सी या ने मुख पक्षाघात हुआ है तो ऐसे समय में भी मुख भाग से तापमान नहीं लेना चाहिए।

नवजात शिशु या छोटे बच्चों में Axillary(बगल) टेंपरेचर लेना योग्य रहता हैl जिन लोगों को त्वचा विकार है या Axilla का कोई ऑपरेशन हुआ है ऐसे लोगों में Axilla का टेंपरेचर नहीं लेना चाहिए।

अगर किसी व्यक्ति के कान की सर्जरी हुई है, कान से पानी, pus या खून बहता है | कान में wax या कोई चीज अटक गई है तो ऐसे वक्त में कान का तापमान नहीं लेना चाहिए। अगर कान में दर्द है टिंपैनिक मेंब्रेन परफोर्रेशन है तो ऐसे समय में कान का तापमान नहीं लेना चाहिए l

पुरुषों की तुलना में महिलाओं में शरीर के तापमान में बहुत ज्यादा बदलाव होते हैं। महिलाओं में होने वाले हार्मोन Changes के कारण यह बदलाव होते हैं।

हर व्यक्ति के शरीर का तापमान उम्र, शारीरिक गतिविधि, लिंग, समय, तापमान लेने की जगह इन सभी चीजों पर निर्भर करता है।

हाइपोथर्मिया स्थिति

  • एंटीडिप्रेसेंट, एंटीसाइकोटिक या Sedative दवाओं का सेवन करने के बाद
  • एनएसथीसिया देने के बाद
  • ब्लड में किसी तरह का इंफेक्शन होने के बाद
  • थायराइड हार्मोन कम होने के बाद
  • कुपोषण के कारण एनोरेक्सिया याने की भूख ना लगने पर
  • शराब या ड्रग्स का सेवन करने के कारण
  • स्ट्रोक या पक्षाघात के कारण
  • तंत्रिका की समस्या इन सभी कारणों से शरीर का तापमान सामान्य स्तर से नीचे जा सकता है जिससे हाइपोथर्मिया कहते हैं।

बुखार मे शरीर का तापमान बढ़ जाता है, जिसका कारण इंफेक्शन होता है। हाइपोथैलेमस शरीर के तापमान को नियमित रखता है। लेकिन पायरोजेंस नामक केमिकल रक्त में संचरित हो जाने पर यह हाइपोथैलेमस के हिस्से को प्रभावित करने लगता है और शरीर का तापमान बढ़ने लगता है l

शरीर में किसी भी तरह का वायरल या बैक्टीरियल इंफेक्शन होने पर तापमान बढ़ सकता है। धूप के ज्यादा संपर्क में आने के कारण सनस्ट्रोक की स्थिति निर्माण होने पर शरीर का तापमान बढ़ सकता है। शरीर में अगर किसी भी तरह का inflammation रहा है तो ऐसे वक्त में भी तापमान बढ़ सकता है, जैसे किआमवात की स्थितिl

शरीर में अगर कहीं पर भी मालिगनेंट टयूमर है तो भी शरीर का तापमान बढ़ सकता है। कुछ दवाएँ जैसे की एंटीबायोटिक, एंटी हाइपरटेंसिव मेडिसीन के कारण भी कभी-कभी शरीर का तापमान बढ़ सकता है। डीटीएपी या नीमोकॉक्कल व्याक्सीनेशन लेने के बाद भी कभी कभी का शरीर का तापमान बढ़ सकता है।

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