श्वासारी प्रवाही के फायदे

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श्वासारी प्रवाही आयुर्वेदिक औषधि है, जो रेस्पिरेटरी सिस्टम याने की श्वसन प्रणाली से संबंधित बीमारियों का इलाज करने के लिए बहुत ही लाभकारी है | ये औषधि फेफडो मे जमा कफ को बाहर निकाल देती है, फेफड़ो को सही तरीके से काम करने में सहायता करती है और साथ में फेफड़ो को पोषण भी देती है |

श्वासारी प्रवाही घटक –
सौंठ, काली मिर्च, पीपल, दालचीनी, लवंग, तेजपत्ता, मुलेठी, बड़ी कटीली, कला वासा, सफेद वासा, बनफशा, भृंगराज, लसोड़ा, अमलतास, ईख इस तरह के घटक मौजूद होते है |

इस औषधी में मौजूद कई सारी चीजों का मसालों में इस्तमाल किया जाता है | इन मसालों का स्वाद तीखा होता है और इनका वीर्य उष्ण होता है | उष्ण वीर्य युक्त चीजे कफदोष शामक, वातशामक होती है |

श्वासारी प्रवाही औषधि में ज्वरनाशक, एंटीबैक्टीरियल, एंटीऑक्सिडेंट्स, एन्टीसेप्टिक्स, एन्टीएलर्जिक गुण मौजूद होते है | मनुष्य शरीर में वात, पित्त, कफ नाम के तीन दोष होते है | इन तीन दोषों पर ही हमारा शरीर निर्भर है |

शरीर में कफ दुष्टि होने के कारण श्वसन संस्था से संबंधित बीमारिया निर्माण होने लगती है | बड़े हुए कफ को बाहर निकालने के लिए ये औषधि बहुत ही लाभकारी है |

इस औषधि में मौजूद कफ निस्सारक गुण कफ को ढीला करके उसे बाहर निकालने में सहायता करते है | इस औषधि में ब्रोन्कोडिलेटर्स और म्यूकोलाईट गुण होते है, जो चेस्ट स्पाज्म को दूर करने का काम करते है |

रायनाइटिस, साइनोसाइटिस, सुखी खांसी, गीली खासीं की समस्या में ये औषधि बहुत ही लाभकारी है | ये औषधि फेफड़ों के संक्रमण को दूर करती है, और सभी तरह की खांसी में आराम देती है |

जिन लोगों को अस्थमा की समस्या है उन्हें इस औषधि के सेवन से बहुत ही लाभ होता है | आप एलोपैथी मेडिसिन के साथ भी इसे ले सकते है इससे कोई नुकसान नहीं होगा |

शरीर की प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होने पर बिमारियों का खतरा निर्माण हो जाता है | श्वासारी प्रवाही औषधि शरीर की इम्युनिटी को बढाती है, और फेफड़ो को स्वस्थ रखने का काम करती है |

शरीर में वात दोष का प्रकोप होने पर या वात दुष्टि होने पर पाचन तंत्र ख़राब हो जाता है | पाचन तंत्र खराब होने के कारण अपच, कब्ज की समस्या निर्माण होती है |

आयुर्वेद के अनुसार पाचन तंत्र खराब रहने के कारण जुकाम खांसी की समस्या होती है | नाक से पानी आने लगता है | इस औषधि में मौजूद जड़ी बूटियों में दीपक और पाचक गुण होते है, जो पाचन तंत्र को उत्तेजित करते है | भोजन को अच्छी तरह से पचाने का काम करते है |

पाचन तंत्र स्वस्थ रहने पर पेट अच्छी तरह से साफ होने पर सर्दी जुकाम खासी की समस्या भी नहीं होती | शरीर की शुद्धि करने के लिए, स्वस्थ जिंदगी जीने के लिए आप इस औषधि का सेवन कर सकते है |

गले में होनेवाली खराश को ठीक करने के लिए आप श्वासारी प्रवाही का सेवन कर सकते है | ये औषधि गले की सूजन और गले के दर्द को दूर करने का काम करती है |
ब्रोंकाइटिस, साँस नली में होनेवाली सूजन को ठीक करने के लिए ये औषधि बहुत ही असरदार है | टीबी की बीमारी होने पर टीबी की दवाईयों का कोर्स पूरा करने के बाद फेफड़ों को स्वस्थ रखने के लिए आप इस औषधी को ले सकते है |

COPD के मरीज को इस औषधी के सेवन से खांसी, साँस फूलना जैसी समस्या में आराम मिलता है | आप रैगुलर मेडिसिन के साथ इसे ले सकते है |

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श्वासारी प्रवाही की मात्रा –

श्वासारी प्रवाही को ५ ml या १० ml तक की मात्रा में दिन में दो बार या तीन बार आप शहद के साथ या गर्म पानी के साथ ले सकते है | ये औषधी पित्तवर्धक होती है इसलिए भोजन करने के बाद ही इसका सेवन करे | गर्भवती महिलाओं को, छोटे बच्चों को इस औषधी का सेवन नहीं करना चाहिए | इस औषधी को लम्बे समय तक इस्तमाल करने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर ले |

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