बिल्वादि चूर्ण के फायदे

58

बिल्व याने बेल जो कि एक पौधा है, जो भगवान शिव जी को बहुत ही प्यारा है l बिल्व 15 से 30 फुट ऊंचा होता है। इसकी पत्तियां तीन और कभी-कभी 5 पत्र युक्त होती है l 

बेल की जड़, छाल, पत्ते, शाखाएं और फल औषधीय रूप से मानव जीवन के लिए उपयोगी है। 

बेल विटामिन ए, विटामिन बी, विटामिन सी और कार्बोहाइड्रेट से भरपूर होता है। इसमें कई रोगों को नष्ट करने की क्षमता होती है l 

बिल्व की तासीर ठंडी होती है। इसके पत्तों में कैल्शियम, लोहा, पोटेशियम, मैग्नीशियम, टैनिन जैसे खनिज और रसायन पाए जाते हैं।  

बेल के पत्तों का स्वाद तीखा होता है l गर्मी और पेट के रोगों से मुक्ति प्रदान करने वाले बेल का आयुर्वेद में बड़ा  विशेष महत्व है l  

बेल के पत्तों में एक सक्रिय घटक होता है। बेल का कच्चा फल उद्दीपन, पाचक, ग्राही, रक्तस्तंभक होता है। 

पका फल कषाय, मधुर, मृदु, रेचक होता है। 

बेल का उपयोग करके कई तरह की आयुर्वेदिक औषधियां बनाई जाती है। इसमें से ही एक औषधि है बिल्व चूर्ण l इस चूर्ण में एंटीसेप्टिक, एंटीबायोटिक, भूख को बढ़ाने वाले गुण मौजूद होते हैं l 

बिल्वादि चूर्ण घटक

  • बेल
  • मोचरस
  • सौंठ 
  • धाय के फूल
  • धनिया 

इस तरह के घटक इसमें मौजूद होते हैं l 

बिल्वादि चूर्ण उपयोग

लूज मोशन या दस्त की समस्या के लिए बिल्व चूर्ण एक बहुत ही अच्छी औषधि है। 

इसमें मौजूद स्तंभक गुण दस्त को रोकने का काम करते हैं।

पेट के विकार या पेट दर्द को ठीक करने के लिए भी आप इसका उपयोग कर सकते हैं।

पेट में आंव आना, ग्रहणी की समस्या में यह एक बहुत ही गुणकारी औषधि है l 

बिल्वादि चूर्ण मात्रा 

3 ग्राम चूर्ण को एक गिलास गर्म पानी या मट्ठे के साथ दिन भर में 2 बार ले सकते हैं l

बवासीर से परेशान व्यक्ति को इसका सेवन नहीं करना चाहिए।

आयुर्वेदा का फेसबुक पेज लाइक करना मत भूलना।

और पढ़े –

Leave A Reply

Your email address will not be published.