सिजेरियन डिलीवरी के बाद देखभाल

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सिजेरियन डिलीवरी के बाद घाव और ड्रेसिंग का ख्याल रखना पड़ता है | टांको और घांव के ताजा होने की वजह से इंफेक्शन हो सकता है |

इससे बचने के लिए कुछ दिन स्नान करने से परहेज करें | 

पहनने के लिए छोटे कपड़ों का प्रयोग करें | समय पर ड्रेसिंग जरूर करें | ऑपरेशन के बाद तुरंत चलना शुरु ना करें |

कुछ दिनों के लिए थोड़ा थोड़ा और धीरे-धीरे करके चलना शुरू करें | 

इसके अलावा बच्चे को स्तनपान करवाते रहने से गर्भाशय को सही स्थिति में आने में सहायता मिलती है |  

ऑपरेशन के बाद 2 महीने तक भारी वजन ना उठाएं अन्यथा ब्लीडिंग हो सकती है | सिजेरियन के बाद महिला को ऐसे काम नहीं करने चाहिए जिससे पेट पर जोर पड़े |

कई बार तो टांके टूट भी जाते हैं, जिससे आपकी तकलीफ और बढ़ सकती है |  

महिला को ऐसा भोजन लेना चाहिए जिससे उसके शरीर को पोषण मिले और इस अवस्था में कब्ज की समस्या भी हो सकती है |

इससे बचने के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी और फाइबर युक्त फल सब्जियों का सेवन करें | 

ऑपरेशन के बाद सीढ़ियों पर चढ़ना शुरू ना करें, इससे पेट पर जोर पड़ता है और महिला को काफी थकान भी हो जाती है |

सिजेरियन के बाद कम से कम 2 महीने तक सेक्स ना करें, अन्यथा गर्भ से संबंधित समस्याएं हो सकती है |   

सिजेरियन के बाद संक्रमण से बचे जिससे सर्दी जुकाम की समस्या ना हो | खांसी आने पर धीरे-धीरे खांसे जोर से खांसने पर टांके टूट जाते हैं |  

सिजेरियन डिलीवरी के बाद महिलाओं के शरीर का शेप थोड़ा बिगड़ जाता है | इससे एक्सरसाइज की माध्यम से आप शेप में ला सकते हैं |

डिलीवरी की तारीख कैसे पता करें

डिलीवरी की संभावित तारीख निकालना बहुत ही आसान है | मोबाइल और कैलकुलेटर के बिना भी आप घर में बैठकर डिलीवरी की तारीख को निकाल सकते हैं। 

डिलीवरी डेट कैलकुलेटर करने के लिए आपको अपने लास्ट पीरियड के पहले दिन की तारीख याद रखनी होती है। 

उसके बाद उसमें 9 महीने जोड़ दे और जो तारीख आएगी उसमें 7 दिन और जोड़ दें |

यहां पर हम एक उदाहरण देखेंगे 

अगर किसी महिला के पीरियड की लास्ट डेट 1 जनवरी है। अगर हम उसमें 9 महीने जोड़ देते हैं, तो तारीख आती है 1 अक्टूबर और फिर हमें इसमें 7 दिन मिलायेंगे | 

1 अक्टूबर में 7 दिन मिलाने से आते हैं 8 अक्टूबर |  

तो उस महिला की डिलीवरी की संभावित तारीख होगी 8 अक्टूबर |  

आप बहुत ही सीधे तरीके से डिलीवरी की संभावित तारीख को निकाल सकते हैं। लेकिन कई बार अल्ट्रासाउंड में शिशु की ग्रोथ को देखकर डिलीवरी की तारीख को डॉक्टर बदल देते हैं। 

लेकिन ऐसा जरूरी नहीं है कि, शिशु उसी दिन जन्म ले |  

क्योंकि यह महिला के शरीर पर और गर्भ में शिशु की पोजीशन पर निर्भर करता है। 

ऐसे में हो सकता है कि शिशु थोड़ा पहले या बाद में जन्म ले।

डिलीवरी के बाद मालिश क्यों जरूरी होती है?

डिलीवरी के बाद मालिश करने के कई सारे फायदे हैं | नॉर्मल डिलीवरी होने के बाद दूसरे या तीसरे दिन से आप मालिश करवा सकती है। 

सिजेरियन डिलीवरी के बाद महिलाओं को टांके खुलने के बाद मालिश करवानी चाहिए। 

डिलीवरी के बाद मालिश करने से शरीर में मांसपेशियों को मजबूत होने में सहायता मिलती है। 

जिससे बॉडी में ऑक्सीजन का प्रवाह भी बेहतर तरीके से होता है। 

डिलीवरी के बाद शरीर में बहुत ज्यादा कमजोरी आती है, जिसके कारण शरीर में दर्द की समस्या होती है। 

ऐसे में मालिश करने से आपके शरीर को बहुत ही जल्दी आराम मिलता है। साथ ही डिलीवरी के बाद महिला को जल्दी रिकवर होने में हेल्प मिलती है। 

डिलीवरी के बाद महिला की त्वचा में ढीलापन आ जाता है। मालिश करने से स्किन में कसाव आने में मदद मिलती है |  

जिससे महिलाओं को डिलीवरी के बाद अपनी बॉडी को शेप में लाने में हेल्प मिलती है। 

डिलीवरी के बाद कई बार महिलाओं के शरीर में कमजोरी और इसको लेकर मानसिक रूप से परेशानी होती है l 

ऐसे में महिला तनाव से गुजरती है। हर दिन मालिश करने से उन्हें शारीरिक रूप से नहीं बल्कि मानसिक रूप से भी आराम मिलता है |  

जिससे उन्हें फिट रहने में सहायता होती है। मालिश करने से स्तन में गांठ नहीं बनती और दूध की मात्रा भी बढ़ जाती है। 

डिलीवरी के बाद शरीर काफी कमजोर हो जाता है जिसके कारण इन्फेक्शन होने का खतरा भी बहुत अधिक होता है। 

ऐसे में मालिश करवाने से महिला की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में हेल्प मिलती है।

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