डीआरडीओ एंटी कोविड-19 ड्रग

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डीआरडीओ एक संस्था है | डीआरडीओ का फुल फॉर्म है डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गेनाइजेशन |  

इसको हिंदी में रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन कहा जाता है |  

डीआरडीओ भारत की रक्षा से जुड़े अनुसंधान कार्यों के लिए देश की अग्रणी संस्था है |  

9 मई 2021 को 2DG मेडिसिन को एंटी कोविड-19 की मान्यता प्राप्त हुई है | इस मेडिसिन को डीसीजीआई (ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया) ने टेस्ट किया है |  

उसके बाद ही इसे एंटी कोविड मान्यता प्राप्त हुई है | इस औषधि को इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूक्लियर मेडिसिन एंड एलाइड साइंस ने डॉक्टर रेड्डी लैबरोटरी के साथ मिलकर इसे विकसित किया है |  

2DG जी का पूरा नाम टू डिऑक्सी – डी ग्लूकोज़ है | यह ग्लूकोस का ही एक मॉलिक्यूल है | इसको केमिकली  मॉडिफाइड किया गया है |  

केमीकली मॉडिफाइड 2DG ग्लूकोज़ जब शरीर की कोशिकाओं के अंदर जाता है, तब यह सेल्स में एनर्जी निर्माण करना बंद कर देता है और कोशिकाओं को मार देता है |  

वायरस से इनफेक्टेड सेल्स का मेटाबॉलिज्म रेट यानी कि चयापचय बहुत ज्यादा होता है |  

कोई भी वायरस जब भी किसी कोशिकाओं में जाता है, तो वह अपने जैसे और वायरस को बहुत तेजी से बढ़ाने लगता है |  

वायरस की प्रतिकृति बनाने के लिए कोशिकाओं को अत्यधिक ऊर्जा की जरूरत पड़ती है | जिसके कारण जो भी वायरस से इनफेक्टेड कोशिकाएं है वह 2DG को बहुत तेजी से अपने अंदर लेती है |  

2DG इसी प्रिंसिपल पर काम करता है | यही 2DG जब वायरस से इनफेक्टेड कोशिकाओं में जाता है और उनकी रासायनिक प्रक्रिया और चयापचय की प्रक्रिया को बंद कर देता है और कोशिकाओं को मार देता है |  

डीआरडीओ के प्रोजेक्ट डायरेक्टर और 2DG के साइंटिस्ट डॉक्टर सुधीर चंदना बताते हैं कि, उन्होंने अप्रैल 2020 में ही 2DG को कोविड-19 से रोकने वाली दवा के रूप में खोज लिया था |  

उसके बाद मई 2020 में उन्हें डी सी जी आय  द्वारा क्लिनिकल ट्रायल के लिए मान्यता प्राप्त हो चुकी थी | अक्टूबर 2020 तक उनका ट्रायल का दूसरा चरण भी पूरा हो चुका था |  

2DG के दूसरे ट्रायल में 110 मरीजोंको शामिल किया गया था |  

इस ट्रायल के बाद उन पेशेंट के वाइटल साइंस में बहुत ही सुधारना देखने को मिली |  

उसके बाद नवंबर 2020 में इनको थर्ड ट्रायल की मान्यता प्राप्त हुई |  

यह ट्रायल भारत के 27 अलग-अलग राज्यों के हॉस्पिटल में हुआ |  इस ट्रायल से पता चला कि 2DG मॉलिक्यूल का इस्तेमाल करने से पेशेंट की रिकवरी बहुत तेजी से होती है और उनकी ऑक्सीजन की मांग भी कम होने लगती है |  

इस परीक्षण में सफलता के बाद ही अब सरकार ने इस दवा को मंजूरी दी है | केंद्रीय रक्षा मंत्रालय के अनुसार 2DG एक जेनेरिक मॉलिक्यूल है और ग्लूकोज से मिलता-जुलता है |  

इसलिए इसका उत्पादन करना आसान होगा | जिसकी वजह से यह देश में बड़े पैमाने में उपलब्ध हो सकता है | 2DG दवा पाउडर के रूप में मिलती है | 

इसे पानी में घोलकर पीना है | इस औषधि की मात्रा कितनी लेनी है, इसकी कितनी कीमत है इसके बारे में अभी तक कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है | 

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