आईबीएस रोग क्या है

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आईबीएस एक पेट की बीमारी है | इसे इरिटेबल बाउल सिंड्रोम कहते हैं। यह कॉलोनी यानी की बड़ी आंत को प्रभावित करता है, जिसके कारण पेट में गैस, सूजन, दर्द, दस्तक, कब्ज की समस्या निर्माण होती है। 

आईबीएस के कारण 

आंत की मांसपेशियों में संकुचन हमारे आंत की दीवार मांसपेशियों की परत से मिलकर बनी होती है। जब हम भोजन करते हैं, तो भोजन पाचन तंत्र में पचने की क्रिया के दौरान यह मांसपेशियां सिकुड़ती है। 

लेकिन जब मांसपेशियां सामान्य से अधिक सिकुड़ जाती है तो पेट में गैस बनने लगती है और सूजन होने लगती है जिसके कारण आंत कमजोर हो जाती है और भोजन को पाचन तंत्र में भेज नहीं पाती। 

इसके कारण व्यक्ति को दस्त होने लगते हैं और इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम की समस्या हो जाती है।

नर्वस सिस्टम में सामान्यता पाचन तंत्र के नसों में असमानता के कारण पेट में गैस बनता है जिसके कारण पेट में अधिक तनाव उत्पन्न होता है । इसके कारण पेट में दर्द होता है | पाचन क्रिया अच्छी तरह नहीं होती और दस्त लगते हैं | 

संक्रमण – आंत में बैक्टीरिया या वायरस की संख्या बढ़ जाने से पेट में हलचल शुरू हो जाती है जिसके कारण आईबीएस की समस्या हो जाती है | 

आंत में सूजन – आईबीएस होने पर कुछ लोगों के आंत में यूनिट सिस्टम कोशिकाओं की संख्या बढ़ जाती है। जिसके कारण पेट में दर्द और डायरिया होने लगता है | 

तनाव – बहुत ज्यादा तनाव में रहने के कारण, हमेशा चिंता करने के कारण भी यह समस्या हो सकती है। 

लक्षण  – पेट में कब्ज होना गंभीर रूप में दस्त लगना, कब्ज के साथ दस्त होना, पेट के निचले हिस्से में दर्द और मरोड़ होना, भोजन के बाद पेट में मरोड़, दर्द अधिक होने पर पेट में गैस बनना और सूजन होना सामान्य से अधिक पतला या सूखा मल निकलना, मल में म्यूकस आना।

आईबीएस के उपाय 

आप अपनी जीवनशैली में बदलाव करके इसको ठीक कर सकते हैं। इसके लिए आपको एक्सरसाइज करने की जरूरत है। 

व्यायाम, योग, प्राणायाम, तनाव को कम कर देते हैं, जिससे यह समस्या काफी हद तक कम हो सकती है। 

आधा चम्मच खीरे को आधा गिलास पानी में अच्छे से उबले पानी आधा रहने पर भोजन करते समय सुबह शाम इस पानी का सेवन करें। इससे आपका पाचन तंत्र सही तरीके से काम करेगा और आपकी परेशानी काफी हद तक कम हो जाएगी | 

भोजन में मसालेदार चीजों का सेवन बिल्कुल भी ना करें | फाइबर से भरपूर शीरे ककड़ी, गाजर, मूली, टमाटर, चुकंदर, स्प्राउट्स, पत्ता गोभी, ओट्स का ज्यादा से ज्यादा सेवन करें | 

पनीर या दूध का सेवन बहुत ही कम करें | चाय, कॉफी, कोल्ड ड्रिंक, सिगरेट, तंबाकू, अल्कोहल का सेवन पूरी तरह से बंद करें। तनाव और चिंता से दूर रहने की कोशिश करें।

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