पीड़ांतक वटी

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पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड कंपनी इस प्रोडक्ट को बनाती है। इसका रजिस्टर्ड ऑफिस दिल्ली में है l हरिद्वार उत्तराखंड जैसी जगहों पर इसका कामकाज चलता है l

जानेवारी 2006 में बाबा रामदेव और बालकृष्ण ने इस कंपनी की शुरुआत की थी l

बालकृष्ण इस कंपनी के मालिक हैं। पतंजलि आरोग्य से जुड़ी कई प्रोडक्ट को बनाती है।

पीड़ांतक वटी एक आयुर्वेदिक औषधि है जिसका उपयोग मुख्यतः गठिया यानी कि अर्थराइटिस के लिए किया जाता है।

गठिया को आयुर्वेद में वात रक्त कहते हैं l

इस बीमारी में शरीर में यूरिक एसिड बढ़ जाता है | जिसके कारण जोड़ों में दर्द और सूजन होने लगती है।

इसके कारण हाथ, पैर और उंगलियों पर सूजन आती है।

इस बीमारी के कारण लोगों का दैनंदिन जीवन बिखर जाता है।

गठिया के कारण जोड़ों में अकड़न आना, जोड़ों पर सूजन आना, चलने में दिक्कत आना, मसल कमजोर बनना, कंधों की अकड़न, अस्थि वृद्धि में बहुत ज्यादा कमजोरी आना और थकान आना जैसे लक्षण दिखाई देते हैं।

पीड़ांतक वटी गठिया के लिए बहुत प्रभावशाली औषधि है।

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पीड़ांतक वटी के घटक

  • अश्वगंधा
  • निर्गुंडी
  • गुग्गुल
  • हल्दी
  • मेथी
  • रासना
  • पुनर्नवा
  • गोदंती भस्म
  • प्रवाल भस्म
  • कुटकी
  • सुरंजन
  • मुक्ताशुक्ति भस्म
  • योगराज गुग्गुल
  • शालीपर्णी
  • कृष्णपर्णी
  • कंटकारी गोखरू
  • अग्निमंद
  • पाटला
  • बेल
  • गंभारी

इस तरह के पांच लघु और पांच ब्रह दशमूल इस औषधि में मौजूद होते हैं।

दशमूल वात दोष को कम करने की एक उत्कृष्ट औषधि।

दशमूल में एनाल्जेसिक यानी की दर्द को कम करने वाले, ज्वरनाशक, एंटीऑक्सीडेंट, सूजन को कम करने वाले गुण मौजूद होते हैं।

दशमूल शरीर को पोषण देके नसों को मजबूत बनाता है। पीड़ांतक वटी में मौजूद गोदंती भस्म, प्रवाल भस्म और मुक्ताशुक्ति भस्म में कैल्शियम की भरपूर मात्रा मौजूद होती है जो हड्डियों के दर्द को कम कर देता है |

हल्दी में मौजूद एंटी इन्फ्लैमटॉरी गुण, एंटी पैरेटिक गुण सूजन और दर्द से बचाने काम करते है |

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