सूर्य नमस्कार

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सूर्य नमस्कार का जिन्होंने प्रचार प्रसार किया। उनका नाम भावनराव श्रीनिवासराव पंत प्रतिनिधि है। उनका जन्म 1868  में हुआ था। भवन राव एक कलाकार,  संस्कृत के विद्वान,  पंचायती राज के समर्थक थे, लेकिन उनकी सबसे अधिक रुचि सूर्य नमस्कार को लोकप्रिय बनाने में थी। 1901 में पिता की मृत्यु के बाद भावनराव के बड़े भाई राजा बनेl लेकर उनमें सत्ता चलाने के लिए जरूरी गुण नहीं थे |

जिसके बाद ब्रिटिश शासन ने भावनराव कोपूना के नजदीकी Aundh का राजा चुना।भावनराव को सबसे अधिक लोकप्रियता सूर्यनमस्कार से ही मिली थी।भावनराव ने शुरुआत में अपने बच्चों को सूर्य नमस्कार का अभ्यास करने के लिए जोर डाला था। 

इसके बाद इन्होंने अपने राज्य में इसे लोकप्रिय बनायाl 1923  में उन्होंने सूर्यनमस्कार पर एक मराठी में किताब लिखी और बाद में इसका अंग्रेजी में अनुवाद करायाl भावनराव ने विदेशों में भी सूर्य नमस्कार का प्रचार किया था। उन्होंने सूर्यनमस्कार पर एक फिल्म बनाई थी और अपनी यूरोप यात्रा में उसे दिखाया था। इस तरह से सूर्य नमस्कार की शुरुआत हुई।

सूर्यनमस्कार का शाब्दिक अर्थ सूर्य को अर्पण या नमस्कार करना हैl सूर्य नमस्कार एक योग आसन है। नमस्कार से शरीर को सही आकार मिलता है। मन शांत और स्वस्थ रहता है। सूर्य नमस्कार में शरीर और मन दोनों को स्वस्थ रखने की शक्ति हैl

सूर्य नमस्कार के १२ आसन

  • प्रणाम आसन 
  • हस्तउत्तानासन 
  • हस्तपाद आसन 
  • अश्व संचालन आसन 
  • पर्वत आसन 
  • अष्टांग नमस्कार 
  • भुजंग आसन 
  • पर्वत आसन 
  • अश्वसंचालन आसन 
  • हस्तपाद आसन 
  • हस्तउत्थान आसन 
  • प्रणाम आसन 

सूर्य नमस्कार करने का सही वक्त

सूर्यनमस्कार सुबह के समय खुले उगते सूरज की ओर मुंह करके करना चाहिए। इसे सुबह खाली पेट ठीक करें।

आप सूर्यास्त के समय भी सूर्य नमस्कार कर सकते हैं।

सूर्य नमस्कार करने के लिए जगह का कोई प्रतिबंध नहीं है। आप अपने घर पर हवादार कमरे में अच्छी खुली जगह पर किसी बगीचे में या घर के आंगन में सूर्य नमस्कार कर सकते हैं।

सूर्य नमस्कार के फायदे

  1. सूर्यनमस्कार एक कार्डियोवैस्कुलर व्यायाम है। अगर आप दिल को स्वस्थ रखना चाहते हैं। दिल के रोगों से बचना चाहते हैं तो सूर्य नमस्कार जरूर करें।
  2.  वजन कम करने के लिए सूर्यनमस्कार एक बहुत ही बढ़िया उपाय नियमित रूप से सूर्य नमस्कार करने से आपके शरीर का आकार नियमित रहेगा। शरीर से चर्बी कम हो जाएगी और इससे आपका वजन नियंत्रित रहेगा।
  3. सूर्यनमस्कार से पूरे शरीर की हालचाल होती है। साथ ही साथ  streching से मांसपेशी और लिगामेंट के साथ रीड की हड्डी मजबूत होती है और कमर लचीली होती है।
  4.  सुबह की धूप में सूर्य नमस्कार करने से शरीर को योग्य मात्रा में विटामिन D  मिलता है। विटामिन D हड्डियों को स्वस्थ रखता है। हड्डियों के दर्द से बचाता है। 
  5. सूर्यनमस्कार से पूरे शरीर का वर्कआउट होता है। इससे शरीर फ्लैक्सिबल बनता है। 
  6. नियमित रूप से सूर्यनमस्कार करना पाचन तंत्र के लिए बहुत ही उपयोगी है। इससे पाचन तंत्र स्वस्थ रहता है। अच्छी तरह से भूख लगने लगती है। व्यक्ति कब्ज पेट की जलन जैसी समस्याओं से दूर रहता है।
  7. सूर्यनमस्कार के दौरान जो आसन किए जाते हैं।  उनमें सास को खींचना और छोड़ना पड़ता है। इससे हवा फेफड़े तक पहुंचती है।इससे खून में ऑक्सीजन पहुंचता है जिससे कार्बन डाइऑक्साइड और विषैले पदार्थ शरीर से बाहर निकल जाते हैं। 
  8. नियमित रूप से सूर्यनमस्कार करने से व्यक्ति का मन शांत रहता है। दिमागी संतुलन स्वस्थ रहता है। व्यक्ति तनाव चिंता से दूर रहता है। सूर्य नमस्कार से थायराइड ग्लैंड की क्रिया नॉर्मल होती है। 
  9. सूर्यनमस्कार करने से व्यक्ति लंबी उम्र तक स्वस्थ और जवान रह सकता है। त्वचा को स्वस्थ रखने के लिए झुर्रियों से बचने के लिए आप नियमित रूप से सूर्य नमस्कार कर सकते है।
  10. महिलाओं को समय पर मासिक धर्म आना बहुत जरूरी है। नियमित सूर्यनमस्कार करने से अनियमित मासिक चक्र की शिकायत दूर होती है और रेगुलर पीरियड्स आते है।
  11.  अगर आप तनाव चिंता से दूर रहना चाहते हैं तो नियमित रूप से सूर्यनमस्कार जरूर करेंl
  12. जिंदगी भर बीमारियों से दूर रहने के लिए एक हेल्थी लाइफ जीने के लिए आप नियमित रूप से सूर्यनमस्कार कर सकते हैं।
  13. सूर्यनमस्कार शरीर के सभी अंगों में रक्त प्रवाह है और ऑक्सीजन को बढ़ाता है और कई प्रकार के रोगों से शरीर की रक्षा करता है।
  14.  नियमित रूप से सूर्य नमस्कार करने से आंखों की रोशनी बढ़ने लगती है।
  15.  सूर्य नमस्कार से दिल, लीवर, आंत, गला और शरीर के सभी अंगों को लाभ पहुंचता है।
  16.  सूर्य नमस्कार से बच्चों में एकाग्रता बढ़ने लगती है। बच्चों का दिमागी स्वास्थ्य अच्छा रहता है।
  1. नमस्कार का पहला आसन है प्रणाम

इसके लिए सावधान स्थिति में दोनों पैरों के तलवे को जोड़कर खड़े रहे। फिर अपनी आंखों को बंद करें। मन को शांत और एकाग्र करके अपने कंधों को ढीला छोड़ दें। फिर सांस भरते हुए दोनों हाथों को उठाकर सामने लाए। फिर सांस छोड़ते हुए हथेलियों को आपस में छोड़कर अपनी छाती या वक्षस्थल के सामने नमस्कार मुद्रा में लाये |

  1.  हस्तउत्तासन

हस्तउत्तासन करने के लिए सबसे पहले प्रणाम की मुद्रा में खड़े रहे। इसके बाद अपने दोनों भुजाओं को पीछे ले कर जाए। इसके बाद अपनी कमर को भी थोड़ा सा पीछे झुकाए अपना सारा ध्यान गर्दन के पीछे विशुद्ध चक्र पर केंद्रित करके

रखेl

  1. पादहस्तासन 

पादहस्तासन करने के लिए सांस को छोड़ते हुए धीरे-धीरे रीड की हड्डी और घुटनों को सीधा रखते हुए आगे झुक जाए। पूरी तरह से सांस छोड़ते हुए हाथों के पंजों को पैर के नजदीक  रखेl

  1. अश्व संचालन

पादहस्तासन की स्थिति में हथेलियों को जमीन पर रखकर सांस लेते हुए सबसे पहले अपने दाएं पैर को सीधा पीछे की ओर फैलाye सीधे पैर का घुटना ज़मीन से मिलना चाहिए। अब दूसरे पैर को घुटने से मोड़कर हथेलियों को जमीन पर सीधा रखें और फिर को आसमान की ओर रखें।

  1. दंडासन

सांस छोड़ते हुए दोनों हाथों को और पैरों को सीधे लाइन में रखें और push up  की पोजीशन में आ जाए।

  1. अष्टांग नमस्कार

अब सांस लेते हुए अपनी हथेलियां सीधा घुटने और पैरों को जमीन से मिलाए। इस अवस्था में रहे और सास को रोके।

  1. भुजंगासन

अब हथेलियों को जमीन पर रखकर पेट को जमीन से मिलाते हुए सिर को पीछे आसमान की ओर जितना हो सके।

  1. अधोमुख शवासन

इसे पर्वतासन भी कहा जाता है। इसके लिए अपने पैरों को जमीन पर सीधा रखें और  kulhe को ऊपर की ओर उठायेl सांस छोड़ते हुए कंधों को सीधा रखें और सिर को अंदर की तरफ रखेl

  1. अश्वसंचालन आसन

धीरे-धीरे सांस लें और सीधा पैर पीछे की ओर फैलाएं। सीधे पैर का घुटना जमीन से मिलना चाहिए। अब दूसरे पर को घुटने से मोड़ें और हथेलियों को जमीन पर सीधा रखें। सिर को आसमान की ओर रखेl

  1. पादहस्तासन

अब धीरे-धीरे सांस छोड़ें और आगे की ओर झुकते हुए हाथों से पैरों की उंगलियों को छुए अपने सिर को घुटनों से मिलायेl

  1. हस्त उत्तानासन

पहली अवस्था में खड़े होकर अपने हाथों को सिर के ऊपर उठा कर सीधा रखें। अब हाथों को प्रणाम की अवस्था में ही पीछे की ओर ले जाएं और कमर को पीछे की तरफ झुकाए। इस आसन को चंद्रासन भी कहते हैं। 

    12. प्रमाण आसन

सूरज की तरह चेहरा करके सीधे खड़े हो जाएं और दोनों पैरों को मिलाएं। कमर सीधी रखें। अब हाथों को सीने के पास लाए और दोनों हथेलियों को मिलाकर प्रणाम की अवस्था में बने रहे।

सूर्यनमस्कार किसे नहीं करना चाहिए 

सूर्यनमस्कार से पेट और दूध की हड्डियों में खिंचाव आता है। इसलिए गर्भावस्था में ऐसे नहीं करना चाहिए। प्रसूति के 40 दिन बाद महिला सूर्य नमस्कार कर सकती है। मासिक धर्म के दौरान सूर्य नमस्कार या कोई भी व्यायाम नहीं करना चाहिए। दिल से जुड़ी बीमारियों में कभी भी सूर्य नमस्कार भी करना, चाहे उच्च रक्तचाप वाले व्यक्तियों को भी सूर्य नमस्कार नहीं करना चाहिए।

किसी का भी सूर्य नमस्कार नहीं करना चाहिए। शरीर में बुखार होने पर सूर्य नमस्कार ना करें। ऐसे वक्त में शरीर दुर्बल रहता है। इसलिए कोई भी शारीरिक श्रम नहीं करना चाहिए। शरीर में बहुत ज्यादा कमज़ोरी होने पर भी। ना करें।

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