स्वस्थ गर्भावस्था

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स्वस्थ गर्भावस्था के लिए जरूरी है कि गर्भावस्था के पहले महीने से ही डॉक्टर से खुद की जांच करें। डॉक्टर द्वारा बताए गए समय पर ब्लड इन्वेस्टिगेशन और अल्ट्रासाउंड करें और डॉक्टर को दिखाएं।

गर्भावस्था में सबसे जरूरी है स्वस्थ आहार इसके लिए पर्याप्त मात्रा में सब्जियां और कुछ कार्बोहाइड्रेट्स जैसे रोटी, ब्रेड और चावल साबुत अनाज का सेवन करें।

इस दौरान आपको प्रोटीन की भी बहुत जरूरत पड़ती है। इसके लिए आप मांस, मछली, अंडा सुखा मेवा और दाल का सेवन कर सकते हैं।

अपने आहार में दूध और दूध से बनी चीजें जैसे कि दही छाछ और पनीर का समावेश करें।

कैल्शियम युक्त चीजें जैसे छोले राजमा बादाम, सोयाबीन पनीर सोया दूध का सेवन करें।

रोजाना 8 से 10 गिलास पानी पिएl पर्याप्त मात्रा में आयरन से भरपूर भोजन का सेवन करें ताकि आपका आयरन स्तर ऊँचा रहे और एनीमिया से बचाव हो सके।

हरी पत्तेदार सब्जियां, पालक मेथी हरा धनिया पुदीना का भरपूर सेवन करें। आयरन से भरपूर सब्जियां जैसे चुकंदर कद्दू का सेवन करें। मांसाहारी पदार्थों को अपने भोजन में शामिल करें। 

गर्भावस्था में खाने की साफ सफाई का विशेष ध्यान देना पड़ता है।

रोडसाइड चीजें खाने में टेस्टी लगती है लेकिन इन्हें खाने से आपको कई तरह के इंफेक्शन होने का खतरा रहता है। 

बारिश के मौसम में बाहर की चीजों का बिल्कुल भी सेवन नहीं करना चाहिए। आपको जो भी चीजें खाने का मन करता है,उन्हें घर पर बनाकर खाए।

गर्भावस्था के दौरान फॉलिक एसिड बहुत ही जरूरी है। यह बच्चों में स्पाइना bifida और अन्य न्यूरल ट्यूब दोष को रोकने में सहायक होता है।

इसके लिए आप फॉलिक एसिड सप्लीमेंट ले सकते हैं।

कुछ सब्जियां जैसे कि पालक, मटर भिंडी शिमला मिर्च,बीन्स में भरपूर मात्रा में फोलिक एसिड होता है। आप इन सब्जियों को भी अपने भोजन में शामिल कर सकते हैं।

गर्भावस्था के दौरान नेगेटिव विचार कैसे दूर करें

गर्भावस्था महिला के जीवन का बहुत ही खास पल होता है। ऐसे समय में महिला का शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ रहना बहुत ही जरूरी है | 

गर्भावस्था के दौरान महिलाओं के मन में नकारात्मक भावनाएं आने पर इससे बच्चा और मां दोनों को हानि पहुंच सकती है। 

अगर आपको बहुत ज्यादा तनाव चिंता या फिर परेशानी हो रही है, तो अपना मन पसंदीदा संगीत सुनें |

संगीत सुनने से आपका तनाव दूर हो सकता है और आपका मन काफी फ्रेश हो सकता है। 

अगर आप चिंता ग्रस्त है तो, एक लंबी सैर पर चले जाए | सुबह के समय और शाम के वक्त मौसम बहुत ही अच्छा होता है। 

ऐसे वक्त में बाहर घूमने से बहुत ही अच्छा महसूस होता है। इससे आपके मन को शांति मिलती है। आपको ताजगी का एहसास होगा | 

आपके मन में जितने भी नकारात्मक भावनाएँ हैं वह दूर हो जाएगी | आपकी मन में नकारात्मक विचार आते हैं, तो ऐसे वक्त में आप बिल्कुल भी अकेले ना रहे |  

अपने घर वालों के साथ दोस्तों के साथ बातें करें | आपके विचारों के बारे में दूसरों को बताएं कुछ बातें अगर आप किसी को बता नहीं सकती है, तो उन्हें किसी डायरी में लिखे |  

ऐसा करने से आपको राहत मिलेगी और आप बेहतर महसूस करेगी |

अपने डर को डायरी में लिखने से आप उससे बाहर निकलने का रास्ता भी निकाल सकती है। 

आप अपने हर दिन की दिनचर्या को डायरी में लिख सकती है। मन में बुरे विचार ना आए इसके लिए आप खुद को दूसरों कामों में व्यस्त रखें |  

इसके लिए अच्छी-अच्छी किताबें पढ़ सकती है। किताबें पढ़ने से आपके ज्ञान में बढ़ोतरी होगी और आपका मन भी शांत रहेगा |  

गर्भावस्था में खाने पीने का बहुत ही ज्यादा ख्याल रखना पड़ता है।

इन दिनों में पोषक तत्वों से भरपूर भोजन लेना जरूरी है। आप अपने पसंदीदा भोजन कर सकती है। 

इससे आपको खाने को भी अच्छी चीजें मिलेगी और मन में भी बुरे विचार नहीं आएंगे | गर्भवती को ८ से ९ घंटे की नींद लेना भी बहुत ही जरूरी है। 

इसलिए रात को जल्दी सो जाए और सुबह जल्दी उठकर हल्का व्यायाम करें |  आप ध्यान भी कर सकती है इससे मन प्रसन्न रहेगा।

गर्भावस्था में खीरा खाने के फायदे

खीरे में बहुत कम मात्रा में फैट और कैलोरी होती है |  

साथ ही इसमें विटामिन, सोडियम, कार्बोहाइड्रेट, फोलेट, मैंगनीज और मैग्नीशियम जैसी कई सारे पोषक तत्व मौजूद होते हैं। 

गर्भावस्था में खीरा खाना बहुत ही फायदेमंद है। इसमें भरपूर मात्रा में पानी मौजूद होता है, जो आपके शरीर को डिहाइड्रेशन से बचाता है | 

खीरे में भरपूर मात्रा में फाइबर मौजूद होते हैं, जो गर्भवती के पाचन तंत्र को सुधारते हैं। इससे आप गर्भावस्था में कब्ज की समस्या से भी बच सकती है | 

खीरे में मौजूद पोषक तत्व ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखते हैं, जिसके सेवन से आप गर्भावस्था में हाई ब्लड प्रेशर की समस्या से भी बच सकती है। 

खीरा गर्भवती की कमजोर हड्डियों को मजबूत बनाता है। 

गर्भावस्था में महिला के पैरों पर सूजन आती है | खीरे में मौजूद पोषक तत्व सूजन को कम करते हैं | 

खीरे का सेवन करने से गर्भवती की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत बनती है | 

खीरा मां और बच्चा दोनों के दिल को स्वस्थ रखने का काम करता है | खीरे में मूत्रवर्धक गुण मौजूद होते हैं, जो पेशाब की जलन को दूर करते हैं | 

गर्मी के मौसम में खीरा आप को ठंडक पहुंचाता है। आप खीरे को ऐसे ही या उसका सलाद बना कर खा सकती है। गर्भावस्था में खीरा खाना बहुत ही लाभकारी है इसलिए का सेवन जरूर करें।

गर्भावस्था में भीगे बादाम खाने के फायदे

गर्भावस्था में आवश्यक विटामिन और मिनरल जैसे विटामिन इ, जिंक, कैल्शियम, मैग्नीशियम और ओमेगा 3 फैटी एसिड शामिल होते हैं |

लेकिन इसका फायदा उठाने के लिए आपको इन्हें भिगोकर खाना होगा |

ऐसा इसलिए क्योंकि बादाम के भूरे रंग के छिलके में टैनिन होता है, जो पोषक तत्वों क अवशोषण को कम कर लेता है |

बादाम को पानी में भिगोने से इसका छिलका आसानी से उतर जाता है और बादाम को पोषक तत्वों को रिहा करने की अनुमति देता है।

भीगा हुआ बादाम पाचन में भी हेल्प करता है। गर्भावस्था में महिलाओं को कब्ज की शिकायत होती है।

बादाम काफी मात्रा में फाइबर मौजूद होता है जिसकी वजह से नियमित रूप से इसे खाने से कब्ज में राहत मिलती है।

बादाम में कैल्शियम अधिक मात्रा में होता है, जिसकी वजह से गर्भावस्था के दौरान होने वाले फ्री इक्लैंपशिया को कम करता है और शिशु की हड्डियां, दाद और तंत्रिका के विकास में हेल्प करता है।

इससे एलडीएल कोलेस्ट्रोल घटता है और दिल सेहतमंद रहता है।

गर्भावस्था में भीगे बादाम खाने से बच्चे की मेमोरी शार्प होती है।

इसके अलावा जो महिलाएं प्रेगनेंसी के दौरान बादाम खाती है उनके शिशु को जन्म के बाद अस्थमा और इससे जुड़ी एलर्जी होने का डर कम होता है।

गर्भावस्था में भीगे बादाम खाने से महिला और बच्चे का वजन बढ़ाने में हेल्प मिलती है |

साथ ही इससे बच्चे की हड्डियां भी मजबूत बनती है और उसके शरीर में खून की मात्रा बढ़ती है।

इसलिए गर्भावस्था के दौरान हर रोज कम से कम पांच छे बादाम भिगोकर जरूर खाने चाहिए।

गर्भावस्था का तीसरा महीना

गर्भावस्था के तीसरे महीने के अंत तक बच्चे की लंबाई लगभग 3.5 इंच हो जाती है.

यह भ्रूण एक बेर के आकार का होता है |  

गर्भावस्था के तीसरे महीने में गर्भवती स्त्री को विटामिन बी, विटामिन सी से भरपूर खाद्य पदार्थों का सेवन करना चाहिए |

खट्टे फल, आलू, अंडे, हरी पत्तेदार सब्जियां को अपने भोजन में समावेश जरूर करना चाहिए। 

गर्भावस्था के तीसरे महीने में आपको एक अल्ट्रासाउंड करवाना चाहिए। 

इसके अलावा समय-समय पर चेकअप, ब्लड प्रेशर चेक अप, शुगर चेकअप करवाते रहना चाहिए। 

अगर आपको गर्भावस्था को लेकर कोई डर चिंता या कोई अन्य परेशानी है, तो अपने डॉक्टर की सलाह जरूर लें |  

तीसरे महीने से आप को हल्के और ढीले कपड़े पहनना शुरू कर देना चाहिए।

अपनी दिनचर्या में हल्की एक्सरसाइज शुरू करें। गर्भावस्था के तीसरे महीने में आप वजन बढ़ने का अनुभव कर सकती है। 

इस दौरान आपकी त्वचा का रंग बदल सकता है। कभी-कभी आप भी इसे महसूस कर सकती है। 

इस दौरान आपका रक्तचाप बहुत जल्दी बढ़ जाता है। 

तीसरे महीने में गर्भाशय पहले से बढ़ जाता है। 

इस दौरान आप  के ब्रेस्ट के आकार में भी परिवर्तन होने लगता है। 

तीसरे महीने के दौरान भ्रूण की पलके, हाथों की उंगलियां और पैर की अंगुलियां निकलने लगती है। 

बच्चे की त्वचा आने लगती है। उनका चेहरा ठीक प्रकार से बन जाता है। इस महीने में बच्चे का आंतरिक अंग  विशिष्ट आकार ग्रहण करने लगता है |   

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