अल्ट्रासाउंड से क्या पता चलता है

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अल्ट्रासाउंड गर्भावस्था का महत्वपूर्ण अंग है | पीरियड्स मिस हो जाने पर आप यूरिन टेस्ट करवाते हैं। 

अगर वह पॉजिटिव आती है, तो भी आपको प्रेगनेंसी है कि नहीं या कितने हफ्ते की है यह जाने के लिए अल्ट्रासाउंड करना पड़ता है। 

अल्ट्रासाउंड में डॉक्टर आपके पेट पर रेडियोएक्टिव जेल लगाते हैं, जिसके माध्यम से शरीर के अंदरूनी हिस्से को देखा जा सकता है। 

यह जेल लगाने के बाद आपके शरीर पर डॉक्टर एक मैग्नेटिक मशीन लगाते हैं। इस मशीन से मैग्नेटिक वेव्स  निकलती है, जो जेल की सहायता से त्वचा को पार कर जाती है और शरीर के अंदरूनी हिस्सों का चित्र कंप्यूटर स्क्रीन पर बनकर आता है।

आम एक्सरे में इस्तेमाल की जाने वाले किरण शिशु को खतरा पहुंचा सकती है,  इसलिए कुछ ऐसे परीक्षण बनाए गए जो शिशु की सेहत को हानि न पहुंचाएं। 

यह अल्ट्रासाउंड बिलकुल सेफ है। इसको करवाने से कोई भी नुकसान नहीं हो सकता। 

अल्ट्रासाउंड में ध्वनी किर्णोद्वारा चित्र उत्पन्न होता है |  

ध्वनि तरंगे अंदरूनी अंगों से टकराकर वापस लौट आती है |  

जैसे यह टकराती है, तो उस मशीन पर इमेज अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट के रूप में पकड़ लिया जाता है। 

गर्भ के अंदरूनी और उनका संपूर्ण विकास सही ढंग से हो रहा है कि नहीं, शिशु के हाथ का विकास, शिशु की हड्डियों में संदिग्ध विकृति, शिशु की लंबाई, शिशु गर्भ में किस अवस्था में पडा है | 

बढ़ते शिशु का सर, मां के शरीर में अम्लॉयटिक द्रव्य का स्तर, शिशु की पैदाइश की तारीख निकालना इन सभी चीजों के बारे में जाने के लिए अल्ट्रासाउंड करने की जरूरत होती है।

अल्ट्रासाउंड कब करवाना चाहिए?

गर्भावस्था में महिला को खुद की देखभाल करने के साथ से ही कई आवश्यक इन्वेस्टिगेशन करने की जरूरत होती है। 

उनमें से ही एक है अल्ट्रासाउंड |  

महिलाओं की यूरिन प्रेगनेंसी टेस्ट पॉजिटिव आने के बाद प्रेगनेंसी कंफर्म करने के लिए अल्ट्रासाउंड करने की सलाह दी जाती है। 

उसमें गर्भ कितने हफ्ते का है, इसके बारे में पता चलता है | अगर इसमें अर्ली प्रेगनेंसी या गर्भ की साइज बहुत ही छोटी दिखती है, तो फिर से 2 हफ्ते के बाद अल्ट्रासाउंड करने की सलाह दी जाती है। 

उसके बाद तीसरे महीने में भी आपको एक अल्ट्रासाउंड करने की जरूरत होती है। जिसमें बच्चे की ग्रोथ के बारे में पता चलता है। 

उसके बाद आपको पांचवे महीने में एनोमली स्कैन करने की जरूरत होती है। इसमें बच्चे के पूरे शरीर के बारे में उसके ग्रोथ और उसमें कुछ विकृति है कि नहीं इसके बारे में पता चलता है |  

उसके बाद आपको सातवें महीने में भी एक अल्ट्रासाउंड करने की जरूरत होती है। 

इसके बाद नौवां महीना पूरा होने के बाद आपको और एक अल्ट्रासाउंड करने की जरूरत होती है। 

इसमें डिलीवरी को कितने दिन बाकी है, बच्चा कितने हफ्ते का हुआ है, इसके बारे में पता चलता है |  

इसके अलावा प्रेगनेंसी के दौरान अगर आपको पेट दर्द होता है, योनि से रक्तस्राव होता है, पानी निकलता है या बच्चे की हलचल महसूस नहीं होती है तो आपको अल्ट्रासाउंड करने की जरूरत पड़ सकती है।

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