वातांतक सिरप के फायदे, घटक और मात्रा

43

मनुष्य के शरीर में वात, पित्त, कफ इस तरह के तीन दोष होते हैं। हमारा शरीर इन तीनों दोषों पर निर्भर रहता है। इन तीनों दोषों में वात दोष को सबसे महत्वपूर्ण बताया गया है। आज हम Vatantak Syrup सिरप के बारे में जानेंगे

वात दोष ‘वायु’ और ‘आकाश’ इन दो तत्वों से मिलकर बना है। हमारे शरीर में गति से छोटी कोई भी प्रक्रिया वात  के कारण ही संभव है। 

रात को देर तक जागना, अधिक भोजन करना, मल मूत्र या छींक को रोककर रखना, अपनी क्षमता से अधिक मेहनत करना, तीखी, कड़वी, चीजें ज्यादा खाना, ज्यादा ठंडी चीजें खाना,व्रत करना, ठंड में घूमना, ज्यादा चिंता करना, ज्यादा सेक्स करना जैसे कारणों से शरीर में वात दोष बढ़ने लगता है।

वात दोष बढ़ने पर शरीर में सुई चुभने जैसा दर्द होता है। हड्डियों में दर्द होता है। हड्डियां टूटना, शरीर में कमजोरी आना,त्वचा रुखी बनाना, शरीर में जकड़न होना, कब्ज की समस्या होना, नाखून दांत त्वचा फीकी पड़ना, मुंह का स्वाद कड़वा होना इस तरह के लक्षण दिखाई देते हैं।

आयुर्वेद के अनुसार वात दोष बढ़ने पर 70 प्रकार की बीमारियां हो सकती है। वातन्तक (vatantak)  सिरप वात दोष के कारण होने वाली बीमारियों के लिए 1 गुणकारी सिरप है l यह हल्का रेचक है,यह भूख में सुधार करता है। मांसपेशियों की दुर्बलता को ठीक करता है।    

गृध्रसी/ साइटिका वात प्रकोप के कारण होने वाली एक बीमारी है। इसमें कमर से लेकर पैर तक साइटिका नाड़ी में सुई की चुभन जैसा दर्द होने लगता है। साइटिका के दर्द को ठीक करने के लिए आप इस सिरप का उपयोग कर सकते हैं।

टिनिटस याने कि आक्षेपक की बीमारी में हाथ पैरों की अन्नेछिक हलचल होकर मिर्गी जैसे लक्षण दिखाई देने लगते हैं। इसके लिए भी आप इस सिरप का उपयोग कर सकते हैं।

 गठिया या संधिवात की बीमारी में भी जोड़ों में घुटनों में तेज दर्द होने लगता है, उनमें सूजन आने लगती है। ऐसे वक्त में सूजन को दूर करने के लिए आप इसका इस्तेमाल कर सकते हैं।

Spondylitis/ कटीस्नायु शूल की बीमारी में भी शरीर में गर्दन के नीचे और हाथों में दर्द होने लगता है। इसके लिए भी यह सिरप गुणकारी  हैं।

सिर दर्द या माइग्रेन की बीमारी भी वात दोष बढ़ने पर होती है। इसके लिए भी वातंतक सिरप गुणकारी है । 

गाउट की बीमारी में भी इस सिरप का इस्तेमाल किया जाता है। अगर किसी को पार्किंसन की बीमारी है तो इसके लिए भी यह  बढ़िया सिरप है। 

बार-बार पैरों में दर्द होना या मांस पेशियों में दर्द होना उसके लिए भी यह सिरप उपयोगी है। इससे दर्द में आराम मिलेगा l डिलीवरी के बाद महिलाओं में आई हुई कमजोरी को दूर करने के लिए ये सिरप बहुत बढ़िया है l 

Shoulder dislocation के बाद अगर किसी को दर्द होता है तो उस दर्द को कम करने के लिए ये सिरप उपयोगी है l

घटक 

त्वक,शतावर, अर्जुन, गोक्षुर, जटामांसी, गुडुची,यष्टिमधु, अश्वगंधा, भृंगराज, दशमूल, त्रिकटु.

मात्रा

दो चमच सिरप में दो चमच पानी मिलकर सुबह श्याम भोजन के बाद सेवन करें |

आयुर्वेदा का फेसबुक पेज लाइक करना मत भूलना।

और पढ़े –

Leave A Reply

Your email address will not be published.