बच्चों में वायरल इंफेक्शन

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बच्चों में वायरल इन्फेक्शन का कारण विषाणु होते हैं, वही बैक्टीरियल इन्फेक्शन का कारण है जीवाणु संक्रमण होता है l मौसम में बदलाव होने पर ज्यादातर वायरल इंफेक्शन फैलने लगते हैं l 

बहुत से अलग-अलग तरह के विषाणु होते हैं, जो शिशु को बीमार बना सकते हैं |  

यह संक्रमित व्यक्ति के खांसने, छींकने से फैलते हैं l यह विषाणु शारीरिक संपर्क से भी फैल सकते हैं जैसे कि विषाणु संक्रमण हाथों के जरिए फैलना l 

आमतौर पर वायरल बुखार का लक्षण ठंड लगना होता है | इसमें 100 डिग्री से ज्यादा बुखार आने लगता है l   

वायरल बुखार में बच्चों के शरीर में दर्द होने लगता है | इसमें और भी कई लक्षण दिखाई देने लगते हैं, जैसे की खासी, जुखाम, गले में दर्द, नाक का बहना, नाक का बंद होना, सिर दर्द होना ठंड लगना, थकान आना, जी मिचलाना, उल्टी आना, डायरिया, पेट में दर्द होना l 

वायरल इंफेक्शन से बचाव

  • बच्चों को वायरल संक्रमण से बचाने के लिए उन्हें बीमारी व्यक्ति से दूर रखें l 
  • बच्चों के सामने खांसते छींकते समय टिशू या रुमाल का प्रयोग करें l 
  • घर में किसी को लूज मोशन,उल्टी की समस्या है तो साफ सफाई का विशेष ध्यान रखें l 
  • अपने हाथों को हैंड वॉश से अच्छी तरह से साफ करके ही बच्चों को हाथ लगाए l 
  • बच्चों में सर्दी जुकाम दस्त उल्टी की समस्या होने पर शरीर में पानी की कमी होने लगती है, इससे बच्चे डिहाइड्रेशन का शिकार बन जाते हैं |  इससे बचने के लिए उन्हें ORS  का पानी पिलाएं, इससे उन्हें एनर्जी मिलती है l
  • अगर आपके बच्चे की उम्र 6 महीने से ज्यादा है तो उसे सूप दाल दही में चीनी मिलाकर आप खाने को देख सकते हैं l बच्चा थोड़ा ठीक होने पर आप उसे दाल खिचड़ी दे सकते हैं l
  • बच्चों को घर में अलग कमरे में शांति से आराम करने दें l संक्रमण के दौरान और इसके खत्म होने के बाद भी कुछ दिनों तक बच्चों को आराम ही करना चाहिए, इससे उन्हें बीमारी से लड़ने में ताकत मिलती है | 
  • अगर आपके बच्चे को तेज बुखार है तो आप हल्के गर्म पानी से उसका शरीर पोंछ सकते हैं, इस पानी में थोड़ा नमक मिलाने से शरीर का तापमान नियंत्रित रहता है l 
  • दिन में कम से कम एक बार खिड़कियां दरवाजे खोले ताकि ताजी हवा अंदर आ सके l अपने घर को हवादार, सुखा और साफ रखने की कोशिश करें l 
  • अगर बच्चे की हालत खराब हो जाती है, तो उसे डॉक्टर के पास दिखाने के लिए जाए l

बच्चों को सुधारने के टोटके

रोते हुए शिशु को शांत कैसे करें

छोटे बच्चे बहुत ही प्यारे और मासूम होते हैं, जो कभी भी बिना वजह से नहीं रोते l उनके रोने के पीछे कई कारण होते हैं l सबसे पहले इस वजह को जानना बहुत जरूरी है l 

जब बच्चों को भूख लगती है तो वे रोने लगते हैं l जो बच्चे बोल नहीं सकते हैं, उनके रोने से ही समझना चाहिए कि उन्हें भूख लगी है l 

जब बच्चे मल त्याग करते हैं, पेशाब करते हैं या फिर उनके कपड़े उन्हें तंग लगते हैं तो वे रोना शुरू कर देते हैं l 

बार-बार एक ही डायपर में पेशाब करने से बच्चों की त्वचा में जलन होने लगती है और वह रोने लगते हैं l 

नवजात शिशु अपने शरीर का तापमान आसानी से नियंत्रित नहीं कर सकते, अगर ज्यादा ठंड लगती है तो वह रोना शुरू कर देते हैं l 

अगर कभी बच्चे को नीचे सुलाया है, तो वह गोद में आने के लिए रो सकता है l 

जब छोटे बच्चों को सोने में परेशानी होती है, थोड़ी भी आवाज उन्हें सहन नहीं होती, ऐसे वक्त में बच्चे रोने लगते हैं l 

अगर बच्चों की तबीयत ठीक नहीं रहती, उन्हें बुखार आने लगता है, उनकी भूख कम हो जाती है, तो ऐसे वक्त में भी बच्चे रोने लगते हैं l 

बच्चे रोने पर उपाय

जब आप बच्चों के रोने के पीछे का कारण समझ लेती है, तो उन्हें आसानी से शांत कर सकते हैं अगर बच्चे को भूख लगी है तो उसे स्तनपान कराएं l 

बच्चा थोड़ा बड़ा है, वह खाना खाता है तो उसे फल, दाल, चावल थोड़े-थोड़े अंतराल में खाने को दें l जिससे उसका पेट भर सके l 

बच्चों के कपड़े जब पेशाब से खराब हो जाते हैं तो उन्हें तुरंत बदल ले l फिर चाहे आपको दिन भर में कितनी बार भी कपड़े क्यों न बदलने पड़े l उन्हें कभी भी गीले कपड़ों में ना रखें,इससे बच्चों को इंफेक्शन हो सकता है l 

अगर बच्चा गर्मी की वजह से रोता है, तो उसे खुला रखें, उसे हवा लगने दें, ताकि बच्चे को अच्छा महसूस हो l अगर उसे ठंड लगती है, तो उसे गर्म कपड़े पहनाए l 

उसे कंबल में अच्छे से लपेट कर रखे, जब बच्चा गोद में आने के लिए रोता है तो उसे प्यार से गोद में उठाए और सीने से लगाए l उसे थोड़ा बहुत  घूमाए l उससे बातें करें, जिससे बच्चों का रोना बंद हो जाता है l 

जब बच्चे को नींद आती है और वह सो नहीं पाते ऐसे वक्त में बच्चे को शांत कमरे में लेके जाए उसे हल्की रोशनी में सुलाने की कोशिश करें l बच्चों को लोरी सुनाए झूला बांधकर उसे झूले में रखें l

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